लखनऊ। कुड़ियाघाट और घंटाघर क्षेत्र में पतंगबाजी का शौक अब जानलेवा साबित हो रहा है। यहां पतंगबाज न केवल प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझे, बल्कि मछली पकड़ने के काम आने वाले फिशिंग केबल (नायलॉन व फ्लोरोकार्बन तार) का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तार इतना धारदार और मजबूत होता है कि राहगीरों की गर्दन और चेहरे को पल भर में रेत सकता है।
अमर उजाला टीम ने जब कुड़ियाघाट पर पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। वहां मौजूद युवकों ने बेखौफ होकर बताया कि वे मछली पकड़ने वाले तार से पतंग उड़ाते हैं, क्योंकि यह टूटता नहीं है और दूसरों की पतंग आसानी से काट देता है। कटी हुई पतंगों को लूटकर दोबारा बेचकर वे पैसे कमाते हैं।
पूछताछ में पता चला कि घंटाघर क्षेत्र की एक दुकान इस प्रतिबंधित तार को गुपचुप तरीके से 1400 रुपये प्रति रील बेच रही है। यह खतरनाक खेल फैजुल्लागंज, खदरा और बड़ी पकरिया जैसे इलाकों के पेशेवर पतंगबाजों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
एक की जान जा चुकी, कई घायल
सुरक्षा नियमों को ताक पर रखने का नतीजा यह है कि पिछले दिनों एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव अपनी जान गंवा चुका है। इसके अलावा आए दिन बच्चे और बुजुर्ग इस अदृश्य और बेहद मजबूत तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
पर्यावरण और बेजुबानों पर दोहरी मार
यह फिशिंग वायर केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि प्रकृति के लिए भी बड़ा संकट है। पेड़ों में फंसा यह तार पक्षियों के पंख काट देता है, जिससे उनकी तड़पकर मौत हो जाती है। यही नहीं, नायलॉन और फ्लोरोकार्बन से बना यह तार कभी नष्ट नहीं होता, जिससे पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंच रहा है।