राजधानी लखनऊ में निर्वाण संस्था में पांच दिन में पांच बच्चों की मौत हो चुकी है। खुलासा हुआ है कि सबसे पहले किशोरी सरोजनी (16) की मौत हुई थी। इस घटना को संचालक ने छिपा लिया था। आरोप है कि न तो प्रशासन को सूचना दी गई और न ही पोस्टमार्टम कराया गया, बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस बच्ची की मौत की जानकारी के बाद बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या पांच हो गई है।
निर्वाण संस्था पीपीपी मॉडल पर संचालित है। मानसिक कमजोर, अनाथ व लावारिस बच्चों को यहां रखा जाता है। यहां 147 बच्चे हैं। ज्यादातर की उम्र 10 से 18 साल के बीच है। बीते एक हफ्ते से संस्था के बच्चे बीमार हैं। बच्चे उल्टी-दस्त, पेट दर्द की शिकायत कर रहे थे। आरोप है शुरुआत में संस्था के जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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संस्था के कर्मचारियों ने 23 मार्च की शाम को प्रशासन को बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने और अस्पताल में भर्ती किए जाने की सूचना दी। तब से अब तक अलग-अलग अस्पतालों में चार बच्चों की जान जा चुकी है। अफसरों का कहना है अब तक पांच बच्चों की मौत हुई है।