नवाबीन-ए-अवध के दौर की विरासतों को समेटे प्रिंसेस फराहना मालिकी की मानें तो पहले गणतंत्र दिवस का जोश इसलिए लखनऊ की फिजा में ज्यादा था, क्योंकि 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम की यादें यहां बसती हैं।
रूमी गेट एक ऐसा मरकज था, जहां से जंग-ए-आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका गया। आजादी के तीन साल बाद 26 जनवरी 1950 में यहां तिरंगा फहराया गया।
इतिहासकार बताते हैं कि शीश महल के आसपास तिरंगा ही तिरंगा दिख रहा था। लोग हुसैनाबाद स्थित घंटाघर पर चढ़ गए और तिरंगा फहरा कर अंग्रेजों की गुलामी से निकलने का संदेश दिया।
मस्जिदों से दी गई थी आजादी की मुबारकबाद
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मस्जिदों में अजान से पूर्व आजादी की मुबारकबाद गूंजने के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी गई थी। बकौल मौलाना सैफ अब्बास नकवी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या से ही शहर में जश्न तारी था।