लखनऊ। बीबीडी विवि की एमबीए छात्रा खुशी सिंह (21) की मौत के मामले में उनके पिता ने बेटी के तीन दोस्तों, हॉस्टल की वार्डन व अन्य सहयोगियों के खिलाफ चिनहट थाने में हत्या की एफआईआर दर्ज कराई। इसे बाद में पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने में तरमीम कर दिया।
पुलिस का दावा है कि खुशी ने आत्महत्या की थी और उनके हाथ का लिखा सुसाइड नोट भी मिला था। मूल रूप से जौनपुर के केराकत पुरेव जलालपुर निवासी खुशी चिनहट के मटियारी स्थित केसी रेजीडेंसी हॉस्टल में रहकर बीबीडी यूनिवर्सिटी से एमबीए कर रही थीं।
उनके पिता चंद्र प्रकाश सिंह का कहना है कि 10 नवंबर की रात उन्हें सूचना मिली कि बेटी ने हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर लिया है और उसका शव राम मनोहर लोहिया अस्पताल की मॉर्च्यूरी में रखा है। खबर पाकर परिजन अस्पताल पहुंचे। उन लोगों को हॉस्टल की वार्डन सुषमा ने बताया कि खुशी को उसके दो दोस्त सुभांशु और आलोक उपाध्याय स्कूटी से अस्पताल लेकर पहुंचे थे। सुभांशु और आलोक ने बताया कि खुशी की आत्महत्या के बारे में उसके दोस्त रोहित भारद्वाज ने बताया था और उसके कमरे में पहुंचने के लिए कहा था। रोहित ने खुशी की रूम पार्टनर और बगल के कमरे में रहने वाली छात्रा को भी यह सूचना दी थी। दोनों छात्राओं ने जानकारी वार्डन को दी।
चंद्र प्रकाश का आरोप है कि रोहित, सुभांशु, आलोक, वार्डन सुषमा और उनके अन्य सहयोगियों ने साजिश के तहत खुशी की हत्या की थी। इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्र ने बताया कि पिता की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई। खुशी के कमरे में मौजूद उसकी डायरी से सुसाइड नोट मिला था।
उनका कहना है कि खुशी ने आत्महत्या की थी। हत्या के केस को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में तरमीम कर दिया गया है। नामजद आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।