कहीं ये लपटें साजिश की तो नहीं : सरकारी दफ्तरों में छुट्टी के वक्त ही क्यों होते हैं शॉर्ट सर्किट
पिकप भवन में बुधवार शाम अग्निकांड के बाद यह सवाल फिर से उठने लगा है कि सरकारी दफ्तरों में छुट्टी के वक्त ही आग क्यों लगती है।
आंकड़े गवाह है कि बीते चार साल में 11 महत्वपूर्ण सरकारी विभागों में अग्निकांड हुए और सभी या तो छुट्टी के दिन हुए या फिर छुट्टी के बाद।
आग में तमाम फाइलों के साथ कई घोटाले, तमाम साजिशें और अधिकारियों व कर्मचारियों की कमियां व लापरवाहियां भी राख हो गईं।
जांच के नाम पर विभागीय अफसर सिर्फ खानापूरी करते रहे। अब तक सिर्फ स्वास्थ्य भवन में लगी आग की साजिश का ही खुलासा हो सका है।
बाकी के अग्निकांडों की जांचें या तो अधूरी पड़ी हैं या फिर गोलमोल रिपोर्ट बनाकर उन्हें दाखिल दफ्तर कर दिया गया।
स्वास्थ्य भवन में डीजी के ऑफिस का अग्निकांड हो या शक्तिभवन के कॉरपोरेट सेक्शन, मिड-डे मील प्राधिकरण के दफ्तर, इंदिराभवन स्थित बाल पुष्टाहार विभाग और स्वास्थ्य भवन की तीसरी मंजिल स्थित लेखा अनुभाग में लगी आग, सभी रविवार को अवकाश के दिन हुए।
डूडा के रिकॉर्ड रूम में शाम को छुट्टी के बाद आग लगी तो मंडी परिषद का भवन आधी रात को धू-धूकर जला था।
महत्वपूर्ण सरकारी विभागों में हुए अग्निकांड में से ज्यादातर छुट्टी के दिन अथवा शाम को छुट्टी के बाद हुए, जिससे साफ है कि आग लगने के पीछे कोई न कोई साजिश जरूर है।
सरकारी विभागों में लगी आग के पीछे वजह कोई भी हो, संबंधित अधिकारी और अग्निशमन विभाग के अफसर उन्हें शॉर्ट सर्किट बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
ज्यादातर दफ्तरों में अग्निकांड रिकॉर्ड रूम, कंप्यूटर कक्ष या फिर ऐसे स्थानों पर लगती है, जहां गोपनीय अथवा महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे रहते हैं।
अग्निकांड के बाद साजिश की आशंकाओं पर पड़ताल होती है। संबंधित विभाग के अधिकारियों के अलावा अग्निशमन विभाग रिपोर्ट तैयार करता है।
लेकिन किसी अग्निकांड में भी साजिश का खुलासा नहीं हो सका। चूंकि अग्निकांड में विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता रहती है।
इसलिए अग्निशमन विभाग की खानापूरी वाली रिपोर्ट को ही सही मानकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। विभागीय जांच में भी लीपापोती कर दी जाती है।
अब तक सिर्फ पांच अगस्त 2015 में स्वास्थ्य भवन में डीजी हेल्थ के दफ्तर में हुए अग्निकांड का ही खुलासा हो सका है। यह खुलासा भी शायद न होता अगर जांच स्पेशल टास्क फोर्स को न सौंपी गई होती।
एसटीएफ की जांच में साजिश की बात सामने आने के बाद एक कर्मचारी को गिरफ्तार भी किया गया था। बाकी अग्निकांड की जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।
इन अग्निकांडों की जांचें अटकीं
27 मार्च 2017 : अलीगंज में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण भवन के सातवें-आठवें और नौवें फ्लोर पर आग से भारी नुकसान।
28 मार्च 2017 : हुसैनगंज स्थित बापू भवन सचिवालय के दूसरे तल पर आग से भारी नुकसान।
14 जून 2017 : गोमतीनगर में वाणिज्य कर विभाग की बिल्डिंग के पांचवें फ्लोर पर आग।
16 मई 2016 : विभूतिखंड स्थित मंडी परिषद भवन के पांचवें और छठे तल पर आग से रिकॉर्ड व फाइलें स्वाहा।
10 मई 2016 : इंदिराभवन स्थित बाल पुष्टाहार विभाग के कार्यालय में रहस्यमय पस्थितियों में आग से दस्तावेज जले।
14 जून 2016 : स्वास्थ्य भवन की तीसरी मंजिल पर स्थित लेखा अनुभाग में आग से महत्वपूर्ण फाइलें राक हो गईं।
6 सितंबर 2016 : मिड-डे मील प्राधिकारण के दफ्तर में आग से कंप्यूटर समेत महत्वपूर्ण फाइलें फुंकीं।
1 दिसंबर 2016 : जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के रिकॉर्ड रूम में आग से हजारों फाइलें स्वाहा।
18 अक्तूबर 2015 : शक्तिभवन विस्तार के कॉरपोरेट सेक्शन में आग से महत्वपूर्ण फाइलें जलीं।