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सचिवालय के बापू भवन में आग, जरूरी फाइलें राख

Tue, 24 Nov 2015 08:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सचिवालय के बापू भवन के पांचवें तल पर कर एवं निबंधन अनुभाग-2 के दफ्तर में सोमवार सुबह रहस्यमयी परिस्थितियों में आग लग गई। इससे वहां रखी महत्वपूर्ण फाइलें, कंप्यूटर सिस्टम, फर्नीचर, अलमारियां, फॉल्स सीलिंग समेत सब कुछ जलकर राख हो गया।
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दमकल की तीन गाड़ियों, हाईड्रॉलिक प्लेटफॉर्म और बापू भवन की फायर यूनिट ने डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है।

विभागीय कर्मियों की मानें तो अनुभाग-दो में जो फाइलें जलीं, वे सभी महत्वपूर्ण थीं। यह पूरा अनुभाग ही नीतिगत मामलों का है।

विभाग के प्रमुख सचिव वीरेश कुमार का कहना है कि इस अनुभाग में वैट अधिनियम, नियमावली, संसदीय समितियों की सिफारिशों, ऑडिट आपत्तियों आदि से संबंधित फाइलें थीं। उन्होंने कहा कि पानी निकलने और सफाई होने के बाद देखा जाएगा कि कौन-कौन फाइलें बची हैं।
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ब्रीदिंग अप्रेटस ने निभाई अहम भूमिका
धुएं की वजह से बापू भवन में घुसना मुश्किल हो रहा था। लिफ्ट और सीढ़ियों समेत इमरजेंसी एग्जिट में पूरी तरह धुआं भर चुका था। ऐसे में दमकल कर्मी राजेश कनौजिया को ब्रीदिंग अप्रेटस पहनाकर हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म के सहारे अंदर भेजा गया। राजेश ने अंदर जाकर उन स्थानों को चिह्नित किया जहां आग अधिक लगी हुई थी।

अग्निशमन दस्ते की एक यूनिट हाईड्रॉलिक प्लेटफॉर्म की मदद से बापू भवन के बाहरी हिस्से में लगी आग बुझाने की कोशिश में जुटी थी। वहीं, दूसरी यूनिट बापू भवन की फायर यूनिट के साथ मिलकर भीतर से आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटी थी।

देर से मिली फायर ब्रिगेड को सूचना

बापू भवन में खुद की फायर यूनिट है। इसके बावजूद आग बुझाने के प्रयास तब शुरू किए गए, जब लपटों ने पांचवें तल को पूरी तरह से घेर लिया। पहले फायर यूनिट खुद ही जूझती रही, लेकिन अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना नहीं दी।

बापू भवन के आस-पास मौजूद लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया तब कहीं जाकर अग्निशमन विभाग को सूचना मिली, तब तक सब कुछ राख हो चुका था। चीफ फायर ऑफिसर अभय भान पांडेय ने बताया कि समय से सूचना मिल जाती तो शायद कुछ कम नुकसान होता। अग्निशमन दस्ते के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि आग पांचवें तल पर ही सिमटी रहे।

किसने रोका फाइलें बाहर निकालने से
आग बुझने के बाद भी अनुभाग दो में रह-रह कर धुआं उठ रहा था। इसे देख सचिवालय सुरक्षा के पशुपति तिवारी ने वहां मौजूद कर्मचारियों से दराजों में रखी फाइलें हटाने को कहा। इस पर कर्मचारियों ने कहा कि फाइलें नहीं हटाई जाएंगी। ऊपर से यही आदेश है। ‘अमर उजाला’ ने जब पूछा कि किसने आदेश दिया है तो कर्मचारी बगैर कोई जवाब दिए वहां से खिसक लिए।

दिन भर लगा रहा तमाशाइयों का तांता
बापू भवन की पांचवी मंजिल पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी दिनभर आते रहे। ऐसे में सफाई कार्य भी बाधित रहा।

फायर अलार्म ने नहीं दिया संकेत

हालांकि, बापू भवन के अधिकारी-कर्मचारी यह कहते नहीं चूके कि किसी तरह की गड़बड़ी नहीं थी, लेकिन कोई इस बात का जवाब नहीं दे सका कि अगर आग लगने पर फायर अलार्म ने संकेत क्यों नहीं दिया। आग बुझाने में शामिल एक कर्मी ने बताया कि फायर फाइटिंग सिस्टम में सिर्फ फायर एक्सटिंग्विशर, वाटर होज आदि काम कर रहे थे।

हाल ही हुआ है फाल्स सीलिंग का काम
बापू भवन में अभी फाल्स सीलिंग आदि का काम चल रहा है। पंचम तल में भी हाल ही यह काम कराया गया है। कर एवं निबंधन अनुभाग दो में आग लगने से कमरे व सामने के गलियारे में फाल्स सीलिंग गिर चुकी थी और बिजली के तार जल कर आपस में चिपक गए थे। विभाग के कुछ लोग वहां काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते सुने गए।

कब क्या हुआ
- सुबह करीब आठ बजे अन्य कर्मियों के आने से पहले फर्राश सुनील कुमार ने पंचम तल पर सफाई  शुरू करा दी थी। एक महिला सफाई कर्मी ने यहां सफाई की।

- सुबह साढ़े आठ बजे छठे तल पर प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल के कार्यालय के गलियारे के बाहर लगे एयर कटर यंत्र में आग लग गई। यहां धुआं उठता देख सफाई कर्मियों ने सचिवालय सुरक्षा के कर्मियों को सूचना दी। इस आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया।

कुछ ही देर में लपटें उठने लगीं

- सुबह करीब सवा नौ बजे पंचम तल में कर एवं निबंधन अनुभाग दो के कमरे से धुआं निकलने लगा। कुछ ही देर में लपटें उठने लगीं। इसकी सूचना सफाई कर्मियों ने सचिवालय सुरक्षा के अधिकारियों को दी। इस पर सचिवालय की अग्निशमन यूनिट पहुंची और उसने फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

- सुबह करीब साढ़े नौ बजे आग बुझाने की कवायद शुरू हो गई थी। गलियारों में धुआं भरे होने से लोगों का सांस लेना दूभर था। किसी तरह खिड़कियों के शीशे तोड़े गए जिसके कुछ देर बाद धुआं छंट पाया।

- सुबह करीब साढ़े दस बजे तक आग पर काबू पाने की मशक्कत चलती रही। अनुभाग दो पूरी तरह पानी से सराबोर हो गया था। बगल के कमरे में स्थित अनुभाग एक में लगे एयर कंडीश्नर से भी धुआं उठने लगा था। वहां भी पानी डाल कर आग बुझाई गई।

अपने-अपने दावे
- बापू भवन के अग्निशमन अधिकारी निरीक्षक हरेंद्र यादव ने कहा कि बापू भवन स्थित यूनिट ने आग पर काबू पाया। फायर ब्रिगेड के सिर्फ हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म से मदद मिल सकी।

- बापू भवन में अग्निशमन यंत्रों की देखभाल करने वाले ठेकेदार संजय श्रीवास्तव का दावा था कि सभी यंत्र सही काम कर रहे थे।

- बापू भवन की अवर अभियंता विद्युत यह नहीं बता सकीं कि आग किस वजह से लगी। पूछने पर वे अपना नाम बताए बगैर चली गईं।

- सीएफओ सुशील कुमार ने कहा कि समय पर आग बुझा ली गई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। आग लगने के कारणों के बारे में वे कोई जवाब नहीं दे सके।
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जांच समिति गठित, एक हफ्ते में देगी रिपोर्ट

राज्य सरकार ने इसके पीछे बड़ी साजिश की आशंका के मद्देनजर जांच कमेटी गठित की है। सचिवालय प्रशासन विभाग के सचिव प्रभात मित्तल ने बताया कि समिति में विशेष सचिव सचिवालय प्रशासन याद अली, अधीक्षण अभियंता 30वां वृत्त लोक निर्माण विभाग, मुख्य अग्निशमन अधिकारी तथा राज्य संपत्ति विभाग के मुख्य व्यवस्था अधिकारी नामित किए गए हैं।

समिति आग लगने के कारणों तथा भविष्य में इस प्रकार की घटना की रोकथाम के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर सचिव, सचिवालय प्रशासन विभाग को मुहैया कराएगी।

इन बिंदुओं पर जांच करेगी टीम
बापू भवन सचिवालय में रविवार को सभी विभागों में छुट्टी रहती है। सोमवार को दफ्तर खुलने से पहले ही कैसे आग लगी। दफ्तर बंद होने के बाद मेन बोर्ड से बिजली की सप्लाई बंद कर दी जाती है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट की संभावना काफी कम हो जाती है।

शॉर्ट सर्किट के अलावा आग लगने की कौन-कौन सी वजहें हो सकती हैं। सबसे पहले आग उसी महत्वपूर्ण कमरे में कैसे लगी, जहां कर एवं निबंधन अनुभाग की महत्वपूर्ण (नीतिगत प्रकरणों की) फाइलें रखी रहती हैं। इसी कमरे को सबसे अधिक नुकसान कैसे पहुंचा। इसमें कौन-कौन से महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें थीं।

इन फाइलों के राख हो जाने का क्या असर होगा। वहां किन-किन कर्मचारियों की ड्यूटी थी। आखिरी बार किसने कर एवं निबंधन अनुभाग में ताले लगाए थे। चाबियां किसके पास रहती थीं।

बापू भवन की फायर यूनिट को आग लगने के कारणों का पता देर से क्यों लगा। वहां लगे स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम काम कर रहे थे या नहीं?
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