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दीपावली से पहले निकला दुकानदार का दिवाला

Fri, 11 Oct 2013 12:14 AM IST
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
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अमीनाबाद मार्केट की आकाशदीप बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर में कॉस्मेटिक और प्लास्टिक के सामान की तीन दुकानों में गुरुवार दोपहर आग लग गई।
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शटर के नीचे से धुआं निकलता देख बिल्डिंग के लोगों ने फायर ब्रिगेड कंट्रोलरूम को सूचना दी। चार बड़ी और एक छोटी फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की।

करीब डेढ़ घंटे मशक्कत के बाद लपटों पर काबू पाया जा सका। दुकानदार ने अग्निकांड में 15 लाख रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका जताई है।

फायर ब्रिगेड के अफसर शार्ट सर्किट के चलते आग लगने की आशंका जताते हुए छानबीन कर रहे हैं। बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर शॉप नंबर बी 8, 9, 10 दुगावां निवासी केदारनाथ वाजपेयी की हैं।
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वैशाली ट्रेडर्स के नाम की दो दुकानों में बाल्टी, बास्केट और मग जैसे प्लास्टिक के घरेलू उत्पाद रखे हैं जबकि एक में कॉस्मेटिक का सामान भरा है। गुरुवार को मार्केट की बंदी होती है।

केदारनाथ दोपहर करीब एक बजे दुकान आए और चार बजे शटर गिराकर चले गए। उनके जाने के कुछ देर बाद बिल्डिंग के लोगों ने शटर के नीचे से धुआं निकलता देखा। मार्केट में हड़कंप मच गया।

सूचना पाकर हजरतगंज फायर स्टेशन से फायर ब्रिगेड अमीनाबाद आ गईं। एफएसओ चंद्रशेखर यादव के नेतृत्व में आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू हुई। धुआं उठता देख आसपास के दुकानदार मौके पर एकत्र हो गए।

दुकानदारों ने बताया कि आकाशदीप बिल्डिंग ओम प्रकाश चावला की है। तिमंजिला कॉम्प्लेक्स की करीब 50 दुकानों में ज्यादातर में कपड़े, कॉस्मेटिक्स और प्लास्टिक का सामान भरा है।

अग्निकांड से केदारनाथ वाजपेयी सदमे में हैं। एफएसओ ने उनसे बातचीत की कोशिश की लेकिन दुकानदारों ने मानसिक स्थिति ठीक न होने की बात कहकर उन्हें टाल दिया।

अग्निकांड के पीछे शॉर्टसर्किट या कोई और वजह?
आग वाकई शॉर्ट सर्किट से लगी या कुछ और वजह थी, इसे लेकर मार्केट में चर्चा शुरू हो गई है। केदारनाथ बाजपेयी ने शॉर्ट सर्किट की बात कही है जबकि लोगों का कहना है कि अगर शार्ट सर्किट हुआ तो तीन ही दुकानों में आग क्यों लगी।

केदारनाथ की चुप्पी भी अग्निकांड का रहस्य और बढ़ा रही है। बंदी के दिन दोपहर को उन्होंने दुकानें क्यों खोली? वह क्या काम करने आए थे? कितनी क्षति हुई है? दुकानों में रखे सामान का इंश्योरेंस था या नहीं? जैसे सवालों का जवाब देने से वह कतराते रहे।
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बिल्डिंग तक नहीं जा सकीं फायर ब्रिगेड
फायर ब्रिगेड की गाड़ियां गड़बड़झाला से आगे नहीं बढ़ सकीं। दरअसल रास्ता काफी संकरा होने के चलते बड़ी गाड़ियां आकाशदीप बिल्डिंग से करीब 300 मीटर पहले ही रुक गईं।

एक छोटी गाड़ी मंगाई गई लेकिन वह भी संकरी गली के भीतर बनी बिल्डिंग तक नहीं जा पाई। किसी तरह पाइप का जुगाड़ कर बिल्डिंग तक पानी पहुंचाया गया।
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