आजम खान ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि लोग कहते हैं कि वे समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह को छोड़ कर नहीं रह सकते हैं, यह सच है।
साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह भी उनके बिना नहीं रह सकते हैं।
इसकी वजह उनकी वफादारी और ईमानदारी है। उन्होंने खुद के ऊपर दंगे कराने जैसे तमाम आरोपों को गलत और खुद को पूरी तरह से बेकसूर बताया।
सोशल मीडिया को अपनी बदनामी का जिम्मेदार ठहराया। आजम ने कहा कि उनके ऑफिस में वे जितनी फाइलें निपटाते हैं, शायद ही उनमें से कोई केवल मुसलमानों के फायदे की होती हो।
आजम ने राहुल गांधी का नाम लेकर उन्हें और उनकी पार्टी को दलितों और मुसलमानों का दुश्मन कहा। जबकि, नरेंद्र मोदी का बिना नाम लिए, मुसलमानों का कत्ल-ए-आम कराने वाला साजिशकर्ता करार दिया।
राजधानी में गुरुवार को राजभवन के नजदीक राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के मुख्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान आजम खान ने अपने ऊपर लगे सांप्रदायिकता के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया।
आजम ने विरोधियों पर जम कर आरोप लगाए। जबकि, हाईकोर्ट द्वारा उनको दिए गए नोटिस के मामले में सधा हुआ जवाब दिया।
मामला कोर्ट में है, वहां जवाब दूंगा
मुजफ्फरनगर मामले में हाईकोर्ट के खुद को दिए गए नोटिस के जवाब में आजम ने कहा कि, यह प्रकरण कोर्ट के विचाराधीन है। मैं और सरकार अब अपना काम करेगी। जबकि, कोर्ट अपना काम कर रहा है। इस संबंध में और कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है।
कांग्रेस ने की मुसलमानों की बदतर हालत
आजम ने कहा कि, कांग्रेस ने 55 साल देश पर राज किया। फिर भी सच्चर कमेटी की रिपोर्ट मुसलमानों की हालत को दलितों से भी खराब मान रही है। ऐसा क्यों है। कांग्रेस के एक सबसे बड़े दलित नेता पूर्व प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार को लोकसभा स्पीकर का पद देकर दरकिनार कर दिया गया है।
आजम ने सवाल उठाया कि उनको कोई केंद्र में कोई अहम मंत्रालय क्यों नहीं दिया गया। रामपुर में राहुल की रैली पर वार करते हुए कहा कि वहां के मुसलमानों का शोषण करने वाले नवाबों के वंशजों के साथ मंच साझा किए जाने से अकलियत को मजाक बनाया गया है।
कत्ल-ए-आम कराने वाले का साथ देना उचित नहीं
भाजपा के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी का बिना नाम लिए कहा कि हल्की दाढ़ी रख कर दाढ़ी और टोपी का अपमान करने वाले और अल्पसंख्यकों का नरसंहार कराने वाले लोगों को हाथों में देश की बागडोर देना क्या उचित होगा।
यह जनता को सोचना है। उन्होंने मोदी की रैलियों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि, उनसे कौन डरता है। हम अपनी तैयारी कर रहे हैं।
फेसबुक पर भड़के आजम
अपने ऊपर लग रहे सांप्रदायिकता के आरोपों पर आजम सोशल मीडिया पर भड़के। उन्होंने कहा कि, फेसबुक पर न जाने किस तरह की बातें उनके बारे में लिखी जा रही हैं। मुझे नहीं लगता कि, इतना अधिक पढ़े लिखे लोग इस तरह के जाल में कैसे फंस रहे हैं और मेरे बारे में गलत बयानी क्यों की जा रही है।
उन्होंने कहा कि क्या यह लगता है कि वे किसी छोटे अधिकारी पर एकपक्षीय कार्रवाई करने का दबाव बना सकते हैं। उन्होंने खुद को पूरी तरह से बेदाग और निष्पक्ष बताया।