लखनऊ के ऐशबाग धोबीघाट बस्ती में रविवार रात अचानक आग लग गई। आग शार्ट सर्किट से लगी बताई जा रही है। रात करीब डेढ़ बजे भड़की आग ने एक-एक कर 57 झोपड़ियों को अपनी जद में ले लिया। आग की चपेट में आने से झोपड़ियों के साथ कई परिवारों के अरमान भी जलकर राख हो गए। पुलिस व अग्निशमन कर्मियों को आग पर काबू पाने के लिए पांच घंटे की मशक्कत करनी पड़ी।
बाजारखाला के ऐशबाग ईदगाह के पास धोबीघाट है। यहां पर झुग्गी बस्ती में करीब डेढ़ सौ परिवार रहते हैं। रविवार रात खाना खाकर अधिकतर परिवार सोए हुए थे। रात एक बजे शोर मचने लगा। तो लोगों की नींद खुल गई। झोपड़ी से बाहर निकलने पर आग की लपटें देख हर कोई सहम गया। जान बचाने के लिए लोग बच्चों को गोद में उठा कर सुरक्षित स्थान की तरफ भागने लगे। उनकी आंखों के सामने वर्षों से बनाई गई गृहस्थी धू-धू कर जल रही थी। महज चंद मिनटों में 57 झोेपड़ियां आग की चपेट में आग गई। आग लगते ही इलाके की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी। पुलिस और दमकल की टीमें लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुटी थीं। प्रभारी निरीक्षक बाजारखाला विजयेंद्र सिंह के मुताबिक, झोपड़ियों में गैस सिलेंडर रखे हुए थे। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
आग की चपेट में आए सिलेंडर, 15 से अधिक धमाकों से दहला इलाका
झोपड़ियों में रखे रसोई गैस सिलेंडर आग की चपेट में आते ही गर्म हो गए जिससे एक-एक कर 15 से अधिक धमाके हुए। देर रात को तेज धमाकों के कारण पूरा इलाका दहल गया। आवाज काफी दूर तक गई। लोग धमाके की तरफ भागे। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को हादसा स्थल से दूर किया। इसके बाद राहत कार्य शुरू किया। पुलिस आग की लपटों के बीच में लोगों के फंसे होने की आशंका से तलाश कर रही थी।
दस गाड़ियों ने पांच घंटे में पाया आग पर काबू
मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह के मुताबिक, हादसे की सूचना मिलते ही 10 दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गई थीं। वह खुद मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि कई घरों की छत प्लास्टिक से ढकी थी जिसकी वजह से लपटें तेजी से फैलीं। गैस सिलेंडर और फ्रिज के कम्प्रेशर फटने से राहत कार्य में दिक्कत आई। गृहस्थी का सामान जलने से दम घुटने वाला धुआं फैल गया था। ऐसे में दमकल कर्मी गैस मास्क लगा कर बस्ती में दाखिल हुए। दस गाड़ियों की मदद से करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद लपटों पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। सीएफओ के मुताबिक, आग किस वजह से लगी अभी इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहना संभव नहीं है। हालांकि प्रथम दृष्टया आग शार्ट सर्किट से लगने की बात सामने आ रही है। इसकी जांच कराई जा रही है।
मलबों में तलाश रहे थे जिंदगी
सोमवार तड़के सूरज की पहली किरण के साथ ही झोपड़ी में रहने वाले लोगों ने मलबों में अपने कीमती सामान के सुरक्षित होने की तलाश शुरू की। 57 घराें की महिलाएं व बच्चे राख में जले हुए सामान बटोर रहे थे। सभी के आंख में आंसू थे। हादसे के शिकार परिवारों की मदद के लिए स्थानीय लोग आगे आए। सुबह होते ही लोग बच्चों के दूध, खाने पीने का सामान लेकर पहुंचे। सभी पीड़ितों को खाना खिलाया। इसकेबाद उनकी आर्थिक मदद भी की। मौके पर सुबह कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक पहुंचे। उन्होंने परिवारीजनों से बातचीत की। उनको सरकार से जल्द आर्थिक मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश से मोबाइल पर बातचीत कर पीड़ितों का सारा ब्योरा तैयार करने को कहा। जिला प्रशासन के अधिकारी और सदर तहसील के लेखपाल प्रदीप बाजपेयी पहुंचे। उन्होंने सभी पीड़ितों का ब्योरा तैयार किया। किसका कितना नुकसान हुआ है। अधिकारियों को चौखट पर देखकर पीड़ित परिवार की महिलाएं घर से मिले जले हुए नोट और जरूरी दस्तावेज दिखा रहे थे।
आग की चपेट में आने से जले मवेशी
आग की चपेट में आने से नसीम की चार बकरियां, नूरजहां की बिल्ली व कछुआ जल गया। वहीं पुत्तन का ई-रिक्शा, रिंकू की बाइक सहित एक दर्जन गाड़ियां, 15 साइकिल जलकर राख हो गई। सोमवार सुबह नूरजहां और शबनम के आंख के आंसू नहीं थम रहे थे। शबनम के मुताबिक उसकी बेटी तबस्सुम की शादी 18 अक्तूबर को थी। इसकेलिए जेवर, कपड़े, दहेज के लिए रुपये और जरूरी सामान खरीद रखा था। आग में बेटी के शादी का सारा सामान जलकर राख हो गया।
बोले, शरीर के कपड़े ही बचे है साहब
आग लगते ही लोग इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाने में जुट गये। नसीम, सलीम और अहमद के मुताबिक एक बजे शोर मचने पर उसकी आंख खुली। तो बाहर आग की लपटें देखा। इसके बाद क्या था साहब महिलाएं बच्चों को अपनी गोद में चिपकाए भाग रही थी। पुरूष बूढ़े मां-बाप के हाथ पकड़ सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे थे। दिव्यांग की जान बचाने केलिए नसीम व हसीब ने अपनी गोद में उठा लिया। आग की चपेट में आने से कपड़े, खाने पीने के सामान जलकर राख हो गये। सिर्फ शरीर पर जो कपड़े थे वही बचे हैं।
साजिशन आग लगाने का आरोप
हसीब केमुताबिक यहां पर सभी परिवार कई पीढ़ियों से रहते हैं। जमीन नजूल की है। इसे लेकर काफी विवाद भी हो चुका है। एलडीए से झुग्गी बस्ती वालों का विवाद भी चल रहा है। आग अचानक नहीं लगी है। साजिश रचकर आग लगाई गई है ताकि हम लोग इस जमीन को खाली कर दें। इस पर बिल्डर अपार्टमेंट बनाकर करोड़ों की कमाई करें। पीड़ितों ने पुलिस से इस मामले की जांच करने की मांग की है।