लखनऊ। वरिष्ठ पत्रकार अहमद इब्राहिम अलवी ने कहा कि फिराक गोरखपुरी की शायरी में भारत की सांस्कृतिक भावना झलकती है। वह सोमवार को फिराक गोरखपुरी, हयात व खिदमत विषय पर आयोजित सेमिनार में संबोधित कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के सहयोग से रोशनी की तरफ सोसाइटी की ओर से प्रेस क्लब में आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि फिराक की शायरी में वह तहजीब थी जो सबको अपने अंदर समेटने की काबिलियत रखती है। लविवि के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. अब्बास रजा नैयर ने कहा कि फिराक ने अपनी शायरी में देश की मिट्टी से उठने वाली सांस्कृतिक खुशबू को समाहित किया। परवेज मलिकजादा ने कहा कि अंग्रेजी साहित्य के प्रतिभाशाली शिक्षक होने के बावजूद फिराक को उर्दू से बेहद प्यार था। संचालन डा. सीमा सिद्दीकी ने किया। सोसाइटी की अध्यक्ष रंजना शर्मा, जियाउल्लाह सिद्दीकी, हुमायूं चौधरी, रफी अहमद और यूनुस सलीम ने अतिथियों का स्वागत किया।