सपा शासन में राज्य भंडारण निगम और सहकारी ग्राम विकास बैंक में हुई भर्तियों में घोटाले की जांच पूरी करने के बाद एसआईटी ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इनमें उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक हीरालाल यादव व रविकांत सिंह शामिल हैं।
इनके अलावा प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष रामजतन यादव, सचिव राकेश कुमार मिश्रा, सदस्य संतोष कुमार श्रीवास्तव, कंप्यूटर एजेंसी एक्सिस डिजिनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के संचालक राम प्रवेश यादव, उप्र सहकारी संस्थागत सेवा, मंडल उप्र कोऑपरेटिव बैंक की प्रबंध समिति व बैंक के अन्य अधिकारियों व कर्मियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। अब इन सभी पर शिकंजा कसेगा। मुख्यमंत्री योगी ने इस मामले की जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिए थे।
योगी सरकार ने एसआईटी को वर्ष 2017 में सहकारिता विभाग व अधीनस्थ संस्थाओं में एक अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2017 के बीच की गई सभी नियुक्तियों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। एसआईटी ने उप्र सहकारी भूमि विकास बैंक, उप्र राज्य भंडारण निगम व उप्र कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में भर्ती के 49 विज्ञापनों के जरिए की गई भर्तियों की पड़ताल की। इनमें नौ विज्ञापनों से जुड़े 81 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी, जबकि 40 विज्ञापनों से संबंधित 2343 के सापेक्ष 2324 पदों पर भर्ती की गई। छानबीन में पता चला कि सहकारी संस्थागत सेवा मंडल के जरिए कोऑपरेटिव बैंक में चार प्रकार के पदों पर भर्ती पूरी की गई, लेकिन इनमें अनिवार्य शैक्षिक योग्यता में नियमों के विपरीत परिवर्तन किया गया।
इन्हें पूछताछ के लिए बुलाया
एसआईटी ने प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक में तैनात रहे अधिकारियों-कर्मचारियों को दो नवंबर से 29 नवंबर के बीच बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। इनमें तत्कालीन मुख्य प्रबंधक नारद यादव, प्रबंधक सुधीश कुमार, आंकिक आशीष जायसवाल, लेखाकार एस जायसवाल व बृजेश पांडेय और प्रबंधक कोंपल श्रीवास्तव शामिल हैं।