प्रदेश के वित्तमंत्री राजेश अग्रवाल और अपर मुख्य सचिव, वित्त संजीव मित्तल के बीच लंबे समय से चली आ रही रार अब खुलकर सामने आ गई है। राजेश अग्रवाल ने प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि वित्त विभाग की कुछ फाइलें बिना मेरे माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को भेजी जा रही हैं। यह निर्धारित प्रक्रिया का सरासर उल्लंघन है। उन्होंने सीएमओ को भेजी गई फाइलों पर दर्ज आदेश एवं गोपनीय सूचनाएं हूबहू समाचार पत्रों पर पहुंचने पर भी गहरी चिंता जताई है।
दरअसल कुछ दिनों पहले वित्त विभाग में चार अपर निदेशकों को निदेशक पद पर पदोन्नति देते हुए उन्हें वर्तमान तैनाती वाले पदों पर ही तैनाती दे दी गई थी। इसके लिए वर्तमान तैनाती वाले पदों का उच्चीकरण करने से भी गुरेज नहीं किया गया।
वित्त मंत्री का आदेश होने के चलते अपर मुख्य सचिव, संजीव मित्तल ने इसका पालन तो किया। लेकिन, संबंधित फाइल बिना मंत्री को दिखाए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी। जहां से नवपदोन्नत निदेशकों को यथास्थान तैनाती देने पर आपत्ति जता दी गई। साथ ही खाली पदों के सापेक्ष प्रस्ताव बनाकर भेजने के लिए कहा। यह खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है-‘कृपया 8 दिसंबर 2018 को दैनिक समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर-नव पदोन्नति निदेशकों को यथास्थान तैनाती पर सीएम कार्यालय की ‘न’ का संज्ञान लेने का कष्ट करें।’
राजेश अग्रवाल ने आगे लिखा है कि विभागों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत हुई पत्रावलियों पर अंकित आदेश एवं गोपनीय सूचनाओं की पूर्ण जानकारी समाचार पत्रों को किस स्तर से प्राप्त हो रही है, यह एक चिंता का विषय है।
वित्त मंत्री ने अपने इस पत्र में कहा है, ‘आप अवगत हैं कि पूर्व में वित्त विभाग की कुछ पत्रावलियां बिना मेरे माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गईं।
यह प्रक्रिया अभी भी जारी है, जोकि कदाचित उचित नहीं है तथा विहित व्यवस्था का उल्लंघन है।’ राजेश अग्रवाल की पीड़ा यहीं नहीं थमी है। उन्होंने लिखा है कि वित्त विभाग की कुछ पत्रावलियों में ‘उच्च स्तर पर हुए विचार-विमर्श के क्रम में प्रस्ताव प्रस्तुत हैं।’
जैसी टिप्पणियां अंकित रहती हैं। जबकि, इस प्रकार के प्रस्ताव बिना मुझसे विचार-विमर्श किए ही प्रस्तुत किए जाते हैं। ऐसे में ‘उच्च स्तर से हुए विचार-विमर्श के क्रम में प्रस्ताव/टिप्पणी प्रस्तुत है’ अंकित करने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हो पाता कि विचार-विमर्श किस स्तर पर हुआ है।
मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे पत्र में राजेश अग्रवाल आगे लिखते हैं कि प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री को हकीकत सामने रखते हुए अपनी चिंता से अवगत कराया है। साथ ही अनुरोध है कि वे मामले को मुख्यमंत्री की जानकारी में लाएं। ताकि, उन्हें (वित्त मंत्री को) मार्गदर्शन मिल सके। हालांकि, इस पत्र में कहीं भी अपर मुख्य सचिव, वित्त का पदनाम या नाम नहीं लिखा गया है। लेकिन, सभी जानते हैं कि वित्त विभाग से सीएमओ को सीधे फाइल उनके माध्यम से ही जा सकती हैं।