छात्रों को शुल्क भरपाई और वजीफे के भुगतान पर वित्त विभाग का अड़ंगा (सांकेतिक तस्वीर)
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अनुसूचित जाति के दो लाख छात्रों को शुल्क भरपाई और वजीफे के भुगतान पर वित्त विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। इन छात्रों को बजट के अभाव में पिछले वित्त वर्ष में भुगतान नहीं हो सका था। बजट के लिए फाइल वित्त विभाग को भेजी गई तो वहां से पूछा गया है कि यह स्कीम बजट एंडेड क्यों नहीं है। बजट एंडेड स्कीम में धनराशि खत्म होने के बाद सरकार की कोई देयता नहीं बचती है।
वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति के 12.5 लाख छात्रों को 1810 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। यह राशि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत दी गई थी। बजट के अभाव में करीब दो लाख छात्र योजना के लाभ से वंचित रह गए। समाज कल्याण विभाग ने इन छात्रों को भुगतान के लिए शासन से बजट मांगा। फाइल वित्त विभाग में गई तो वहां से आपत्ति लग गई। वित्त विभाग ने पूछा कि बजट खत्म होने के साथ ही इस स्कीम में भी देयता खत्म होने का प्रावधान क्यों नहीं है।
यहां बता दें कि अनुसूचित जाति के छात्रों को योजना का लाभ देने के लिए केंद्र सरकार भी आर्थिक मदद देती है। इस स्कीम में प्रदेश सरकार की वचनबद्ध देयता 1750 करोड़ रुपये है। उससे ज्यादा जितनी भी राशि की जरूरत होती है, उसका भुगतान केंद्र सरकार करती है। इसलिए इस स्कीम को बजट एंडेड नहीं रखा गया है।
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अनुसूचित जाति के छात्रों को भुगतान के लिए पहले कभी इस तरह की आपत्तियां नहीं लगाई गईं। क्योंकि, धनराशि केंद्र सरकार से आसानी से मिल जाती है। पूरे मामले में समाज कल्याण विभाग आपत्ति का जवाब तैयार कर रहा है।