पुनरीक्षण बाद मतदाता सूचियों में बढ़ी वोटरों की संख्या व पहली बार महिला आरक्षित हुई महापौर की कुर्सी के कारण सभी लोग इस बार निकाय चुनाव में बढ़चढ़ कर मतदान की उम्मीद संजोए थे।
रविवार को संपन्न हुए मतदान दिवस पर हुए मात्र 34.2 फीसदी मतदान ने इस उम्मीद को तोड़ कर रख दिया। शहरी क्षेत्रों में शुरूआती दौर से ही मतदान को लेकर वोटरों में जिस तरह की उदासीनता दिखायी पड़ी जो मतदान समाप्ति तक कायम रही। हालाकि जून 2012 में हुए निकाय चुनाव के 33.2 फीसदी मतदान प्रतिशत की तुलना में बेहतर दिखा।
मतदान में एक बार फिर फिसड्डी साबित रहे शहरी वोटरों ने निकाय चुनाव में महापौर पद के लिए पहली बार पार्टी सिंबल पर चुनावी जंग लड़ रहे पांचों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की धुकधुकी को भी तेज कर दिया है। कम मतदान प्रतिशत के चलते पहली महिला महापौर बनने की चुनावी जंग रोचक परिणाम दिखाएगी।
दूसरी तरफ राजधानी क्षेत्र से जुड़ी आठ नगर पंचायतों के मतदाताओं ने एक बार फिर शहरी क्षेत्र के वोटरों को आइना दिखाते हुए उत्साह के माहौल में बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सेदारी कर 60 फीसदी वोटिंग का आकंड़ा पार किया। शहरी वोटरों की संडे का अवकाश मनाने की सोच एक बार फिर मतदान दिवस पर भारी पड़ती दिखी।