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'बुरी फिल्में अक्सर, अच्छी फिल्में अचानक बनती हैं'

Fri, 15 Nov 2013 11:40 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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हिंदुत्व व इस्लाम की समानताओं पर लिखने और उपनिषदों को फारसी में अनुवाद करने वाले सूफी संत दारा शिकोह के जीवन पर आधारित नाटक ‘दारा शिकोह’ मंच पर उतरेगा।
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यह पहला मौका है जब फिल्म निर्देशक पद्मश्री एमएस सत्थ्यू के नाटक का मंचन प्रदेश में हो रहा है। यह मंचन संगीत नाटक अकादमी में इम्प्रेसारिया एशिया की ओर से जनवरी में होगा।

भारत विभाजन पर बनी फिल्म ‘गर्म हवा’ के निर्देशक श्री सत्थ्यू को पद्मश्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। निर्देशक श्री सत्थ्यू ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत की।
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आज की फिल्मों को कहां पाते हैं?
- वह दौर कुछ और ही था। आर्ट फिल्मों को लेकर निर्देशकों भी रुचि थी और दर्शक भी उन्हें देखना पसंद करते थे। आज ऐसी फिल्में बनाई और पसंद की जा रही हैं, जो प्रोड्यूसरों को कमाई दे और दर्शकों की थकान मिटा सके। क्योंकि, अच्छी फिल्में अचानक और बुरी फिल्में अक्सर बनती रहती हैं।

रंगमंच व नुक्कड़ नाटक की वर्तमान स्थिति कैसी है?
- नुक्कड़ नाटक तो मदारी के खेल की तरह होता है। सब कुछ मौके पर ही तय करना पड़ता है। वहीं, रंगमंच की वर्तमान स्थिति क्या है यह किसी से छिपी नहीं है। बावजूद इसके देश के कई छोटे व मंझले शहरों में रंगमंच तेजी से फल-फूल रहा है, जिसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

आपके निर्देशन की क्या खासियत रही?
- मैं अपनी फिल्मों में किरदारों को खुलकर अपने भाव प्रकट करने का मौका देता रहा हूं। साथ ही क्लोज अप शॉट्स और दर्शकों को बांधे रखने वाले दृश्यों पर काफी काम करता रहा हूं, जो आज की फिल्मों से गायब सा है।
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