लखनऊ। सिविल अस्पताल की इमरजेंसी ओपीडी के विस्तार की प्रक्रिया छह माह से ठंडे बस्ते में है। कार्यदायी संस्था ने दो मंजिला इमरजेंसी ओपीडी का खाका तैयार किया था, लेकिन प्रस्ताव को अफसरों ने खारिज कर दिया। अब फाइल नए सिरे से तैयार की जा रही है। अफसरों के अनुसार, योजना के तहत इमरजेंसी ओपीडी के पिछले हिस्से को तोड़कर विस्तार किया जाना था।
वर्तमान में इमरजेंसी ओपीडी में दो बेड हैं, जबकि इमरजेंसी वार्ड में 30 बेड। इमरजेंसी ओपीडी में प्राथमिक इलाज के बाद ही मरीजों को वार्ड में शिफ्ट किया जाता है, मगर क्षमता कम होने के कारण मरीजों को कई बार गेट पर स्ट्रेचर पर ही लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए तत्कालीन निदेशक डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने इमरजेंसी ओपीडी के विस्तार की योजना बनाई थी। कार्यदायी संस्था ने फाइल तैयार भी कर दी थी, लेकिन अफसरों ने मंजूरी नहीं दी और निदेशक के रिटायरमेंट के बाद फाइल डंप हो गई।
20 बेड की नई इमरजेंसी ओपीडी का प्रस्ताव
योजना के अनुसार, इमरजेंसी ओपीडी का विस्तार कर 20 बेड किया जाना था। इसके लिए ओपीडी के पिछले हिस्सा तोड़कर खाली पड़ी जमीन पर निर्माण होना था। वर्तमान में इस हिस्से में पार्किंग और जन औषधि केंद्र संचालित है, जबकि काफी भूमि खाली पड़ी है।
Iइमरजेंसी ओपीडी विस्तार से जुड़ी फाइल की जानकारी अभी नहीं है। यदि पहले कोई कार्ययोजना बनी थी, तो उसे लागू किया जाएगा, ताकि मरीजों को असुविधा न हो।I
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- डॉ. कजरी गुप्ता, निदेशक, सिविल अस्पतालI