यूपी के स्कूल ही नहीं बालवाड़ी व आंगनबाड़ी केंद्रों में भी बच्चे नहीं
जा रहे। ग्रामीण शिक्षा पर ‘असर’ की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं।
प्राथमिक शिक्षा के साथ प्री-स्कूलिंग पर किए गए सर्वे में जो आंकड़े सामने
आए हैं उससे साफ है कि आंगनबाड़ी व बालवाड़ी केंद्रों पर तो अभिभावक
बच्चों को भेजना ही नहीं चाहते।
यूपी में जो प्री-स्कूलिंग हो रही है,
उसमें निजी स्कूलों का योगदान है। प्री
स्कूलिंग पर ‘असर’ का सर्वे तीन से छह वर्ष के बच्चों पर किया गया।
इसमें
पता लगाने की कोशिश की गई कि स्कूलिंग की आयु छह वर्ष तक या उससे पहले
कितने बच्चे आंगनबाड़ी, बालवाड़ी या फिर निजी स्कूलों में एलकेजी व यूकेजी
में पढ़ते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर किए गए सर्वे के आधार पर
यह बात सामने आई कि तीन साल की उम्र के महज 22.8 प्रतिशत बच्चे ही यूपी के
आंगनबाड़ी व बालवाड़ी केंद्रों पर पढ़ते हैं।
वहीं देश में यह प्रतिशत 56.8
है। तीन से छह वर्ष तक स्कूल या प्री-स्कूल में न जाने वाले बच्चों की
संख्या के आधार पर भी यूपी देश की तुलना में काफी पीछे है।
सूबे में तीन
साल की उम्र के 67.6 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो न स्कूल में जाते हैं और न
प्री-स्कूल में। देश में यह प्रतिशत महज 35.5 है।