सीतापुर। जिले में शुक्रवार को ईद मनाई जाएगी। इसको लेकर गुरुवार को पूरे दिन तैयारियां चलीं। पकवान बनाने के लिए खरीदारी हुई। घरों की साज-सज्जा को अंतिम रूप दिया गया। कोरोना की रोकथाम के लिए लोगों ने घरों पर रहकर ईद मनाने का फैसला किया है। रोजेदारों ने कहा कि संक्रमण को देखते हुए गले मिलने से तौबा करना है। दिल से मिलने के लिए नजदीक होना जरूरी नहीं होता। करीब एक महीने से जिस लम्हे का इंतजार अकीदमंदों को था, आखिरकार वो गुरुवार शाम को आ गया।
मरकजी कमेटी की ओर से चांद देखे जाने का ऐलान होते ही आकीकद मंदों के चेहरों पर अल्लाह का नूर छा गया। घर-आंगन में खुशियां छा गईं। बच्चे चहक उठे। बड़ों के चेहरों पर मुस्कान बिखर गई। फोन की घंटियां बजने लगी। बधाइयों का दौर शुरू हो गया। व्हाट्सएप और फेसबुक बधाई संदेशों से भर गया।
इससे पूर्व घरों में पूरे दिन ईद का तैयारियां चलती रहीं। घर परिवार में कोरोना संक्रमण के बीच कैसे त्योहार मनाया जाए, इसे लेकर चर्चाएं होती रहीं। उपलब्ध सामग्री से किस तरह स्वादिष्ट पकवान बनाएं जाएं, इस पर परिवार के लोगों में बातें हुईं। खातूनों ने मेहंदी रचाई।
घर पर ही बनवाएंगे सभी पकवान
पुराने शहर में मोहम्मद आलम, बेगम समा परवीन और बेटे आफताब व अफरोज के साथ बैठकर ईद को लेकर चर्चा कर रहे थे। आलम ने बताया कि उन्होंने घर पर ही रहकर ईद मनाने का फैसला लिया है। बच्चों को भी कहीं जाने नहीं देंगे। बच्चों के पसंद के सभी पकवान घर पर ही बनवाए दे रहे हैं। बच्चों का बाहर निकलने का मन नहीं करेगा।
घर-परिवार के साथ मनाएंगे ईद
पुराने शहर के अनीस बेग अलीसा, अनीसा, फैजल, अनस आदि ईद की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मंथन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अबकी ईद पर घर का कोई भी सदस्य दहलीज नहीं पार करेगा। परिवार के साथ ही ईद का लुत्फ लिया जाएगा। सेवई, दही बड़ा के साथ ही कौन से अन्य पकवान बनाएं जाए, इसे लेकर बच्चों से बात हो रही थी।