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आईईटी में पढ़ाई महंगी, एमटेक, एमबीए, एमसीए की फीस दोगुनी बढ़ी

Wed, 27 Jun 2018 01:23 AM IST
अक्षय कुमार/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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एलयू के बाद अब आईईटी की पढ़ाई भी महंगी हो गई है। प्रदेश के पुराने व प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक राजधानी लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में नए सत्र 2018-19 में बढ़ी हुई फीस ही देनी होगी। संस्थान ने एमटेक, एमबीए, एमसीए, बीटेक (स्ववित्तपोषित) कोर्स की फीस दोगुना या उससे ज्यादा बढ़ा दी है। बीटेक एडेड कोर्स की फीस भी 75 फीसदी से अधिक बढ़ाई है। वहीं छात्रावास शुल्क सभी क्लास के विद्यार्थियों को 5000 रुपये अधिक देना होगा।

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नए सत्र से सभी विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क भी 6500 की जगह 7500 रुपये (एमटेक में 7000) देना होगा। यह फैसला पहले ही लिया जा चुका था। कुल मिलाकर इस बार आईईटी में पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को मोटी रकम खर्च करनी होगी। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) कार्य परिषद, संस्थान की वित्त समिति की हरी झंडी के बाद इस लागू कर दिया जाएगा।

संस्थान द्वारा की गई शुल्क वृद्धि के अनुसार, एमबीए की सालाना फीस में 140 फीसदी, एमसीए में 80 फीसदी, एमटेक में दोगुना, बीटेक स्ववित्तपोषित (इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग) में दोगुना और बीटेक रेगुलर (सिविल, केमिकल, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) में 75 फीसदी शुल्क वृद्धि हुई है। एमटेक में ट्यूशन फीस के साथ यूजर चार्ज भी बढ़ाया गया है। नए शुल्क की सूचना संस्थान की वेबसाइट ietlucknow.ac.in पर अपलोड कर दी गई है। ताकि प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी इससे जागरूक रहें।

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...तो प्रवेश पर पड़ सकता है असर

आईईटी ऐसा सरकारी संस्थान है, जिसे प्रवेश के लिए विद्यार्थी सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। यहां प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की अपेक्षा कम शुल्क होने के कारण प्रवेश के समय यह विद्यार्थियों की पहली पसंद होता है। सत्र 2017-18 में एसईई की काउंसलिंग से ही यहां की अधिकतर सीटें भर गईं थीं। बची सीटें स्पॉट काउंसलिंग में भर गईं। फीस बढ़ने से हो सकता है कि इसका असर प्रवेश पर पड़े। इसे लेकर अधिकारी-शिक्षक भी चिंतित हैं।

तर्क : सुविधाएं बढ़ीं, आठ साल बाद बढ़ाया शुल्क
आईईटी के निदेशक प्रो. एचके पालीवाल कहते हैं कि हमने छात्रों के लिए छात्रावास, लैब, क्लास रूम में काफी सुविधाएं बढ़ाई हैं। नए शिक्षकों की भर्ती हुई है, कुछ और भर्ती किए जा रहे हैं। महंगाई भी काफी बढ़ी है। विद्यार्थियों को आवश्यकतानुसार और बेहतर संसाधन देने का प्रयास किया जा रहा है। इन सभी वजहों से फीस बढ़ाई गई है। शासन से मात्र टोकन ग्रांट मिलती है। संस्थान की आय का कोई और स्रोत नहीं है। इसकी वजह से लगभग 8 साल बाद फीस रिवीजन की जा रही है।
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