आईईटी ऐसा सरकारी संस्थान है, जिसे प्रवेश के लिए विद्यार्थी सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। यहां प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की अपेक्षा कम शुल्क होने के कारण प्रवेश के समय यह विद्यार्थियों की पहली पसंद होता है। सत्र 2017-18 में एसईई की काउंसलिंग से ही यहां की अधिकतर सीटें भर गईं थीं। बची सीटें स्पॉट काउंसलिंग में भर गईं। फीस बढ़ने से हो सकता है कि इसका असर प्रवेश पर पड़े। इसे लेकर अधिकारी-शिक्षक भी चिंतित हैं।
तर्क : सुविधाएं बढ़ीं, आठ साल बाद बढ़ाया शुल्क
आईईटी के निदेशक प्रो. एचके पालीवाल कहते हैं कि हमने छात्रों के लिए छात्रावास, लैब, क्लास रूम में काफी सुविधाएं बढ़ाई हैं। नए शिक्षकों की भर्ती हुई है, कुछ और भर्ती किए जा रहे हैं। महंगाई भी काफी बढ़ी है। विद्यार्थियों को आवश्यकतानुसार और बेहतर संसाधन देने का प्रयास किया जा रहा है। इन सभी वजहों से फीस बढ़ाई गई है। शासन से मात्र टोकन ग्रांट मिलती है। संस्थान की आय का कोई और स्रोत नहीं है। इसकी वजह से लगभग 8 साल बाद फीस रिवीजन की जा रही है।