आरोपियों के बारे में जानकारी देते डीएम और एसपी।
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एक सप्ताह पूर्व मंदबुद्धि युवती की हत्या में उसके मां बाप और भाई ही शामिल निकले। घटना के दिन और उससे पहले परिवार की गतिविधियों व आसपास के लोगो से घटना के खुलासे में लगी पुलिस की चार टीमों ने पूछताछ की तालमेल न बैठने पर पुलिस को शक हुआ और फिर परिवार के लोगों को पकड़कर जरा सख्ती की उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
सोमवार को पुलिस लाइन के सभागार में पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद व डीएम डा. आदर्श सिंह ने प्रेसवार्ता कर इसका खुलासा किया। एसपी ने बताया कि कोठी थाना क्षेत्र के ग्राम कौरहापुरवा में रहने वाले कोटेदार मंशाराम उसकी पत्नी और बेटे हरिओम को आज जेल रवाना कर दिया। उन्होंने बताया कि 17 जनवरी को मंशाराम की 22 साल की बेटी की लाश बगल के गांव जैदपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बीबीपुर में एक खेत मे मिली थी। गला दबाकर हत्या और निजी अंगों से छेड़छाड़ के कारण रेप भी दर्ज हो गया था। युवती के मंदबुद्धि होने के कारण उसके पास मोबाइल भी नही था इसलिए पुलिस ने पूरा फोकस उस दिन घटनास्थल पर गतिविधियों पर किया। इसके अलावा परिवार का फीड बैक भी गांव वालों से लिया।
फिलहाल तफ्तीश में पता चला कि मृतका के पैर में गोबर लगा मिला था जबकि घटनास्थल पर जो चप्पल मिला था उसमें गोबर नही लगा था। मृतका 7 नम्बर का चप्पल पहनती थी और वहां मौके पर मिला चप्पल 4 नम्बर का था। घटना के दिन वहीं खेत मे काम कर रहे उसी गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि मंशाराम करीब सुबह साढ़े सात व आठ बजे आया था और मुझसे अपनी लड़की के गायब होने के सम्बन्ध में बताते हुए पूछा कि कहीं दिखी तो नही जबकि पुलिस को मंशाराम ने मृतका को 9 बजे प्रात: शौच के लिए जाना बताया गया। इसके अलावा मृतका की मां को घटना स्थल के पास मनरेगा मजदूरों द्वारा देखा गया था।ये सारी बातें शक का आधार बनती गईं। इधर गांव के लोग भी पिता पर उंगली उठाने लगे थे। तीनों को हिरासत में लेकर हुई पूछताछ रंग लाई और युवती की हत्या का राज खोल दिया। पुलिस ने पिता, मां और भाई को जेल भेज दिया।
सरकारी मदद की आस में अपने ही बने हत्यारे
मंदबुद्वि युवती की हत्या के खुलासे के बाद भले ही माता-पिता व भाई शार्मिंदगी की बात कर रहे हो। मगर, सरकारी मद्द की आस व एक तीर से कई निशाने साधने वाले शातिर अपने ही निकले। रेप के बाद हत्या कर जहां मंदबुद्वि से छुटकारा मिलता। वहीं सरकारी मद्द के साथ कई विरोधियों को सलाखों के पीछे भेजने की मंशा भी चतुर कोटेदार पिता मंशाराम की थी।
मगर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कप्तान का शक परिवार पर बढ़ा और मंशाराम की मंशा पूरी नहीं होने दी। घटना के बाद डाक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। वीडियोग्राफी भी हुई। मगर, रेप के सिमटम नहीं मिले। सिर्फ गुप्तांगों में चोट के निशान मिलने पर पुलिस को दर्ज मुकदमें में रेप की धाराएं बढ़ाने पड़ी। इसके बाद से पुलिस की तफ्तीश बढ़ी और परिवारी जनों से कडाई से पूछतांछ की तो सच निकलकर सामने आ गया।
पुलिस टीम की अधिकारियों की प्रशंसा
मंदबुद्वि युवती की हत्या के खुलासे में पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने पांच टीमें गठित की गई थी। इसमें प्रभारी सर्विलांस सेल अक्षय कुमार, जैदपुर थाने के निरीक्षक वीरेंद्र बहादुर सिंह, कोठी थानाध्यक्ष रितेश कुमार पाण्डेय, सतरिख थाने के प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार वर्मा तथा सफदरगंज थानाध्यक्ष श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस टीमों ने घटना का खुलासा किया। इसको लेकर डीएम व एसपी ने पुलिस टीम की सराहना की।