निजामुद्दीन ने उसका शव घर पर ही छिपा दिया। चार दिन बाद दुर्गंध आने पर उसने शव ठिकाने लगाने की साजिश रची और बाजार से संदूक खरीदकर लाया। इसके बाद शव पन्नी में लपेटकर दुर्गंध छिपाने के लिए कुनैन व ओडोनिल की गोलियां डाल दीं और संदूक बंद कर दिया।
बस्ती के लिए छह हजार रुपये में पिकप वाहन बुक कराया। बस्ती पहुंचने पर बड़ेवन पुलिस चौकी के पास उसने पिकप वाहन से संदूक उतरवाया तो पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस का कहना है कि बस्ती में निजामुद्दीन ने लंबे अरसे तक नौकरी की थी। शव ठिकाने लगाने के लिए वही जगह उसे मुफीद लगी।
बड़ेवन चौकी इंचार्ज विनोद यादव ने बताया कि निजामुद्दीन ने पिकप वाहन के चालक से कहा था कि संदूक में उसके रिटायरमेंट से संबंधित कागजात हैं। यह कागजात बड़ेवन पहुंचाने हैं। चालक उसकी बातों पर भरोसा करके चल पड़ा।
वह संदूक छोड़कर वापस लखनऊ चला गया तभी बड़ेवन चौकी की पुलिस आ गई। बुधवार शाम क्षेत्र में फायरिंग और छावनी में मुठभेड़ होने के कारण पुलिस खासी चौकन्नी थी। चौकी के अंदर बैठे पुलिसकर्मी फोरलेन पर आने-जाने वाले वाहनों की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रहे थे।