एलएमआरसी ने एक और बड़ा टेंडर जारी कर दिया है। इस टेंडर की खास बात ये है कि कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (सीबीटीएस) तकनीक पर काम करने वाली कंपनी ही रोलिंग स्टॉक सप्लाई करेगी और सिग्नलिंग और सिस्टम भी संचालित करेगी।
सीबीटीएस तकनीकी के चलते मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी। इससे स्टेशनों पर ट्रेन के मिलने का समय 7 मिनट से घटकर मात्र डेढ़ मिनट तक हो जाएगा।
ये टेंडर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक होगा। इस बार रोलिंग स्टॉक (इंजन बोगी, सिग्नलिंग और कंट्रोलिंग सिस्टम) के लिए कॉर्पोरेशन की ओर से निविदा आमंत्रण किया गया है।
इसमें डिजाइनिंग से लेकर सिस्टम को स्थापित कर संचालित करने तक की जिम्मेदारी कार्यदाई कंपनी की होगी। 17 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच टेंडर डाक्यूमें जारी होंगे।
ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग काम जारी
सबसे पहले ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग के बीच मेट्रो रेल का संचालन किया जाएगा। यहां सिविल निर्माण के लिए टेंडर एलएंडटी लिमिटेड को दिया जा चुका है। इसका काम भी शुरू हो चुका है। पहले टेंडर 541 करोड़ रुपये का था, लेकिन इसे बढ़ाकर 631 करोड़ रुपये का स्वीकृत कर दिया गया है।
इसके अलावा डिजाइन कंसलटेंट का टेंडर हुआ था, जिसमें सियेस्ट्रा लिमिटेड को काम दिया गया। मवैया में स्पेशल स्पैन के लिए भी टेंडर कर दिया गया।
नया टेंडर पूरे नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए
रोलिंग स्टॉक के लिए टेंडर प्रक्रिया का आगाज किया गया है। ये टेंडर पूरे नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए होगा। बोगियों और पूरे सिस्टम के निर्माण और सप्लाई वगैरह में करीब डेढ़ साल का समय लगता है। इसलिए अभी से ये टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है।
दिसंबर-2016 तक एलएमआरसी को मेट्रो रेल परियोजना का परीक्षण भी शुरू करना होगा। इन सारे रूटों पर शुरुआत में कुल फेरे 13 होंगे, जबकि धीरे धीरे इनकी संख्या 38 तक हो जाएगी। छह कोच वाली ट्रेन चलेगी। बोगियों की संख्या शुरुआत में 78 होगी, जबकि बाद में बढ़ कर यह 228 तक जाएगी।
अलग तरह की होगी बोगी
एलएमआरसी ने जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की निविदा आमंत्रण के लिए टेंडर डॉक्यूमेंट की बिक्री का आगाज किया है, उसके मुताबिक ये अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग (इंटरनेशनल कांप्टेटिव बिडिंग) होगी।
जिसमें डिजाइन, मैन्यूफैक्चरिंग, सप्लाई, टेस्टिंग, कमीशनिंग और ट्रेनिंग भी कार्यदाई एजेंसी को करनी पड़ेगी। इसमें ट्रेनों का नियंत्रण, सिग्नलिंग, टेलीकॉम्यूनिकेशन सिस्टम शामिल होगा। बोगियां इलेक्ट्रोमैकेनिकल यूनिट (ईएमयू) टाइप होंगी।
इसमें सीबीटीएस पर सिग्नल होंगे और ट्रेनें संचालित की जाएंगी। इस तकनीक के जरिये लखनऊ मेट्रो अब तक देश में चल रही सबसे तेज मेट्रो ट्रेन हो सकती है। दिल्ली मेट्रो ने भी अपने नये रोलिंग स्टॉक टेंडर इसी सिस्टम को अमल में लाने वाली कंपनियों को ही देने का फैसला किया है।
ऐसे में दिल्ली या लखनऊ दोनों ही इस विधि पर ट्रेन दौड़ा सकती हैं। दो मेट्रो ट्रेनों के बीच का समय (हेडवे) जो अभी लखनऊ के लिए न्यूनतम ढाई मिनट का तय है, वह घट कर डेढ़ मिनट तक हो जाएगा। देश में इतनी तेजी से मेट्रो ट्रेन नहीं मिलत है।