सूबे में महिलाओं के प्रति अपराध के प्रकरणों के तेजी से ट्रायल के लिए हर जिले में फास्ट ट्रैक कोर्ट होंगे। इसकी योजना बन गई है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। कैबिनेट से जल्द ही सभी 75 जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का प्रस्ताव पर मुहर लगवाने की तैयारी है।
प्रदेश में महिला उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं और बदायूं में दो बहनों की हत्या के बाद राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश सरकार की किरकिरी हुई थी।
मुख्यमंत्री ने खुद लिखा पत्र
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसी दौरान महिला उत्पीड़न से जुड़ी घटनाओं में दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए प्रदेश के हर जिले में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना का ऐलान किया था।
मुख्यमंत्री ने पिछले जून में इसके लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर अपनी सहमति देने का आग्रह किया था।
न्याय विभाग के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के पत्र पर मुख्य न्यायाधीश की सहमति सरकार को प्राप्त हो गई है। अब विभाग मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप हर जिले में एक-एक फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को लेकर तेजी से कार्यवाही कर रहा है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की आगामी बैठक में मंजूरी के लिए लाया जा सकता है।
नहीं होगी पैसे की कमी
जानकार बताते हैं कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना, पद सृजन व अन्य जरूरी आवश्यकताओं के लिए वित्तीय प्रबंध के संबंध में वित्त विभाग की सहमति मिल गई है।
इस मामले पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि राज्य सरकार प्रदेश में महिलाओं के सम्मान व सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
महिलाओं के खिलाफ हो रही आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए यह जरूरी है कि उनकी तत्काल विवेचना कराकर संबंधित मुकदमों का तेजी से निस्तारण कर दोषियों को दंडित किया जाए। इसके लिए हर जिले में एक-एक फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे।