बहराइच जिले से सटी नेपाल की खुली सीमा अराजक तत्वों को अरसे से रास आ रही है। कभी आतंकी मशरूर तो कभी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकी सीमा की सुरक्षा में सेंध लगाते रहे हैं। तीन वर्ष पूर्व इंडियन मुजाहिदीन के फरार आतंकी अफजल ने भी छिपने के लिए नेपाल की खुली सीमा का सहारा लिया था।
उसे मुंबई एटीएस के अधिकारियों की टीम ने रुपईडीहा थाना क्षेत्र के नेपालगंज रोड रेलवे स्टेशन के निकट नोमेंसलैंड के पास से ही दबोचा था। इसके पूर्व भी देश विरोधी तत्व घुसपैठ करते रहे हैं। हालांकि भारत-नेपाल के मुख्य रास्तों पर कड़ी चौकसी के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन मोतीपुर, मुर्तिहा, रुपईडीहा और नवाबगंज थाना क्षेत्रों में ग्रामीण अंचलों में नोमेंस लैंड से बने रास्तों पर अक्सर सन्नाटा पसरा रहता है।
खास बात यह है कि मोतीपुर से रुपईडीहा थाना क्षेत्र के मध्य 19 स्थानों पर नोमेंस लैंड पर नेपाल क्षेत्र के लोगों ने अतिक्रमण कर मकान और अहाते बना रखे हैं। तिलहन, गेहूं, आलू और गन्ने की फसल लहलहा रही है। लेकिन नोमेंस लैंड का परिक्षेत्र प्रतिबंधित होता है।
इसके चलते यहां पर न तो भारतीय पुलिस और न ही नेपाली पुलिस कार्रवाई करती है। जिस कारण नोमेंस लैंड पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और अहातों में दहशतगर्द आसानी से शरण लेकर सुरक्षा तंत्र के लिए चुनौती बनते हैं।