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बर्बाद हो जाएंगी खेती, बंधुआ बन जाएंगे मजदूर : सपा

Fri, 25 Sep 2020 07:40 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी ने संसद में पारित किए गए किसानों व श्रमिकों के हितों पर आघात करने वाले विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को  प्रदेश भर में जिलाधिकारियों के मार्फत राज्यपाल को ज्ञापन भेजे। सपा ने मांग की है कि केंद्र सरकार के कृषि व श्रम कानून प्रदेश में लागू न किए जाएं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार चंदा देने वाले पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए पहले किसानों के शोषण का बिल लाई और फिर अपने उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रमिक शोषण का एकतरफा बिल लाई है।
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सपा ने कृषि से जुड़े बिलों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलन का समर्थन करते हुए शुक्रवार को प्रदेश भर में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे गए। सपा ने कृषि के साथ श्रम कानूनों को  वापस लेने की मांग की है। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी जनहित के मुद्दों को उठाने में हमेशा आगे रहे हैं। सत्तादल के दमन का विरोध हमेशा समाजवादियों ने ही किया है। उन्होंने कहा कि युवा बेरोजगार है, किसान की जमीन पर बड़े-बड़े पूंजीपतियों की नजर है। संसद में बहुराष्ट्रीय कंपनियों व चंद उद्योगपतियों के लिए ही कानून बन रहे हैं। भाजपा सत्ता की खुमारी में रायशुमारी की हत्या करने पर तुल गई है।

भाजपा की कुनीतियों से समाज का हर वर्ग परेशान है। छात्रों की पढ़ाई बाधित है, युवाओं पर लाठियां बरसाई जा रही है। महिलाओं, बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं थम नहीं रही हैं। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार की रोकथाम नहीं है। सचिवालय के अंदर तक से ठगी की साजिशें पनपती हैं। सरकार बढ़ते अपराधों के आगे बेदम है। कृषि व श्रमिकों से जुड़े जनविरोधी कानूनों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। किसान जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। राजधानी लखनऊ में सपा जिलाध्यक्ष जयसिंह जयंत व महानगर अध्यक्ष सुशील दीक्षित की अगुवाई में डीएम को ज्ञापन दिया गया। उनके साथ विधायक अंबरीष पुष्कर, अनीस राजा, राम करन निर्मल, अरविंद गिरि व प्रदीप यादव समेत की नेता थे।
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छिन जाएगा किसानों का मालिकाना हक
ज्ञापन में सपा ने कहा है कि कृषि व श्रमिक कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश में खेती बर्बाद हो जाएगी, श्रमिक बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएंगे। भाजपा सरकार किसानों का मालिकाना हक छीनना चाहती है। एमएसपी सुनिश्चित करने वाली मंडिया धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। किसानों को फसल का एमएसपी तो दूर, उचित दाम भी नहीं मिलेगा।     कृषि अध्यादेश के बाद भाजपा सरकार श्रमिक विरोधी औद्योगिक संबंध संहिता-2020 विधेयक ले आई है। श्रमिक कानून में बदलाव के बाद तो श्रमिकों का शोषण करने का पूरा अधिकार फैक्ट्री मालिकों को मिल जाएगा। अभी तक 100 कर्मचारी वाले औद्यौगिक प्रतिष्ठान बिना सरकारी मंजूरी लिए कर्मचारियों को हटा नहीं सकते थे। नई व्यवस्था में 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कम्पनी सरकार से मंजूरी लिए बिना जब चाहे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल बाहर कर सकती है।
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