गन्ने के समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी के विरोध में शनिवार सुबह किसानों ने विरोध-प्रदर्शन कर गन्ने की होली जलाई।
गौरतलब है कि गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग राज्यमंत्री सुरेश राणा ने शुक्रवार को गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंतल की वृद्धि के साथ ही ढुलाई भाड़े में लगभग 50 फीसदी कमी की घोषणा की थी।
लेकिन किसान संगठनों व राजनीतिक दलों ने इस बढ़ोतरी को ऊंट के मुंह में जीरा बताया और प्रदेश सरकार पर शुगर लॉबी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया था।
इसके साथ ही, भाकियू ने शनिवार को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में गन्ने की होली जलाने की घोषणा भी की थी। उसी क्रम में आज विधानसभा पर किसान संठनों ने गन्ने की होली जलाकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के दौरान गन्ना मूल्य, गन्ना बकाया व घटतौली का मुद्दा चुनावी जनसभाओं में उठाने वाले मोदी तो उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार से ही गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने में असफल रहे।
प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में सिर्फ 10 रुपये की वृद्धि कर गन्ना किसानों के साथ भद्दा मजाक किया है। भाकियू इससे संतुष्ट नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार गन्ना मूल्य पर पुनर्विचार कर अपने संकल्प पत्र में किए वादे के अनुसार गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर किसानों को लाभकारी मूल्य दे।