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लाखों किसानों के लिए है ये खुशखबरी

Thu, 16 Oct 2014 09:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और उस पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर से प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों को मुस्कराने का मौका मिल सकता है।
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किसानों को 31 अक्तूबर तक पूरा गन्ना मूल्य अदा करने के साथ देरी से किए गए भुगतान पर ब्याज मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने चीनी पर पहला हक किसानों का माना है और उसे बेचकर ब्याज समेत गन्ना मूल्य चुकाने का आदेश दिया है।

पहले पांच सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले और फिर 13 अक्तूबर को उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर से गन्ना किसानों को राहत मिली है।

हाईकोर्ट ने जब ब्याज समेत गन्ना मूल्य भुगतान का आदेश दिया था तब चीनी मिलों के पास 2.98 करोड़ क्विंटल चीनी थी। इस चीनी की कीमत नौ हजार करोड़ रुपये से ऊपर आंकी गई थी।
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उस समय गन्ना किसानों का पांच हजार करोड़ रुपये मूल्य बकाया था। इसके बाद ढाई से तीन हजार करोड़ रुपये की चीनी बेच दी गई। इससे किसानों को भुगतान भी हुआ।

इसके बाद चीनी मिलों के पास छह हजार करोड़ से ज्यादा मूल्य की चीनी बची है जबकि किसानों के फिलवक्त केवल 2900 करोड़ रुपये बकाया हैं।

यदि पांच सौ करोड़ रुपये ब्याज को भी जोड़ दें तो चीनी मिलों पर किसानों की देनदारी 3400 करोड़ रुपये बैठती है। इसे चुकता करने के बाद भी दो-ढाई हजार करोड़ रुपये की चीनी बची रह जाएगी।

पांच सितंबर के हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शुगर मिलों को यह चीनी तब तक वापस नहीं मिलेगी जब तक कि किसानों को ब्याज समेत गन्ना मूल्य नहीं मिल जाएगा।
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सरकार कर रही ब्याज माफी पर विचार :

भले ही कोर्ट ने ब्याज समेत गन्ना मूल्य भुगतान के आदेश दिए हों लेकिन राज्य सरकार चीनी मिलों पर लगने वाले ब्याज की माफी पर विचार कर रही है।

पिछले सत्र की ब्याज माफी के लिए यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने गन्ना आयुक्त को प्रत्यावेदन दिया था। इस पर गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा ने अपर गन्ना आयुक्त लोकेश कुमार की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी।

लंबे समय बाद 14 अक्तूबर को इस कमेटी की मीटिंग में ब्याज माफी के प्रत्यावेदन पर विचार किया गया। इसमें संयुक्त गन्ना आयुक्त बीके शुक्ला, गन्ना संघ के एमडी सुल्तान अहमद और कई गन्ना समितियों के चेयरमैन भी शामिल हुए।
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