बुंदेलखंड की बंजर जमीन पर लगे सोलर पैनल।
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उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड की बंजर और कम उपजाऊ भूमि अब सौर ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन रही है। जहां पारंपरिक खेती संभव नहीं या एक ही फसल होती है, वहां निजी कंपनियां किसानों को मुनाफे का गणित समझाकर सोलर प्लांट लगा रही हैं। इस क्षेत्र में करीब 25 हजार एकड़ भूमि पर सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं। इनमें से कुछ में उत्पादन शुरू हो गया है और कुछ में तैयारी चल रही है।
महोबा के पनवाड़ी में तीन किसानों की जमीन पर 15 मेगावाट का सोलर प्लांट लगा है। इनमें अवधेश प्रताप सिंह ने 30 एकड़ जमीन दी। वह पहले गेहूं या चना उगाते थे। इसमें मजदूरों की कमी और जुताई, बुवाई, खाद में ढाई से तीन लाख रुपये खर्च के बाद नीलगाय व अन्य जंगली जानवरों से फसल को नुकसान के बाद बमुश्किल से आठ से दस लाख रुपये ही मिल पाते थे।
सालाना 15 लाख रुपये की आय हो रही
अवधेश को अब एक निजी कंपनी के साथ सोलर प्लांट के 29 साल 11 महीने के करार के तहत प्रति एकड़ 50 हजार रुपये सालाना मिल रहे हैं। इसमें हर साल तीन फीसदी वृद्धि भी होगी। इस प्रकार बिना खर्च उन्हें सालाना 15 लाख रुपये की आय हो रही है।
गरौरा के महेंद्र राजपूत और कनकुआ के दयाशंकर दुबे जैसे कई किसान सोलर प्लांट से आय हासिल कर रहे हैं। हालांकि, चित्रकूट के कोटवामाफी गांव के किसान अमित सिंह पटेल शिकायत करते हैं कि कंपनियां समझौते की रकम किस्तों में देती हैं। भुगतान भी तय समय पर नहीं होता।
कंपनियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
ललितपुर के तालबेहट पहुंचे एक सोलर एनर्जी कंपनी के एजेंट मयंक लोधी 15 मेगावाट के सोलर प्लांट के लिए जमीन तलाशने आए थे। वह बताते हैं कि सरकार ने सोलर पार्क के लिए कुछ सरकारी और कुछ किसानों से जमीन अधिग्रहण करके दी है। उनके मुताबिक, किसान ऊसर जमीन किराये पर देने से पहले अलग-अलग कीमत मांग रहे हैं।
एक मेगावाट के लिए पांच एकड़ जमीन
यूपीनेडा के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, एक मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करीब चार से पांच एकड़ जमीन और करीब पांच करोड़ रुपये का निवेश लगता है। बुंदेलखंड में कुल 25000 एकड़ जमीन पर सोलर परियोजनाएं चल रही हैं या शुरू होने वाली हैं।
यूटिलिटी स्केल प्रोजेक्ट्स में ज्यादातर सरकारी जमीन का इस्तेमाल हुआ है, जबकि कुछ अतिरिक्त जमीन किसानों से किराये पर ली गई है। ओपेन एक्सेस प्रोजेक्ट्स के तहत करीब 3150 एकड़ जमीन पर किसानों से सीधे समझौते किए गए हैं।
कमेटी निपटाती है विवाद
सोलर कंपनी और किसान के बीच विवाद होने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी कमेटी निस्तारण करती है। निजी निवेशकों को प्लांट लगाने पर स्टांप ड्यूटी में शत-प्रतिशत और 10 वर्षों के लिए 100 फीसदी बिजली ड्यूटी छूट दी जा रही है।
प्रदेश में वर्ष 2026-27 का लक्ष्य
- सोलर पार्क की क्षमता 14 हजार मेगावाट
- आवासीय रूफटॉप सोलर 4500 मेगावाट
- वाणिज्यिक रूफटॉप सरकारी 1500 मेगावाट
- पीएम कुसुम योजना (सोलर पंप) 2000 मेगावाट
अभी तक उपलब्ध सौर ऊर्जा
- 2876 मेगावाट उत्पादन हो रहा है।
- 4816 मेगावाट जल्द उत्पादन की तैयारी है।
बुंदेलखंड में उत्पादन की स्थिति
- 885 मेगावाट यूटिलिटी स्केल सौर पावर परियोजना में उत्पादन।
- 4100 मेगावाट यूटिलिटी स्केल सौर पावर परियोजना में उत्पादन की तैयारी।
- 336 मेगावाट ओपेन एक्सेस सौर पावर परियोजना में उत्पादन।
- 394 मेगावाट ओपेन एक्सेस सौर पावर परियोजना में उत्पादन की तैयारी।
- 7800 मेगावाट की पावर परियोजना पाइप लाइन में हैं।
यूपीनेडा निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि प्रदेश में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बढ़ाने पर काम जारी है। बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा हब बन गया है। यहां बेकार पड़ी जमीन पर सोलर प्लांट लग रहे हैं। ओपेन एक्सेस के तहत निवेशक प्लांट बढ़ा रहे हैं।