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लविविः आधे की हुई परीक्षा, आधे को प्रमोशन का इंतजार

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अक्षय कुमार
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कोरोना संक्रमण ने लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने फर्स्ट ईयर फर्स्ट सेमेस्टर के विद्यार्थियों को लेकर अजब स्थिति पैदा कर दी है। इनके आधे विद्यार्थियों की परीक्षाएं हो गई और उनका परिणाम भी आ गया। जबकि आधे कोर्सों की परीक्षा नहीं हो पाई। अब विश्वविद्यालय खुद नहीं समझ पा रहा है कि वह इस पर निर्णय क्या ले? खास ये कि इस मामले में विश्वविद्यालय ने शासन से मार्गदर्शन भी मांगा था, लेकिन वहां से भी यही कहा गया कि इस मामले में विश्वविद्यालय खुद निर्णय ले।
विश्वविद्यालय में मार्च में विभिन्न कोर्सों की ऑड सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की गईं। इस क्रम में मार्च अंत में एमबीए, बीबीए, बीबीए टूरिज्म, लॉ, बीटेक, बीसीए, एमसीए फर्स्ट ईयर फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की गईं। जबकि फर्स्ट ईयर फर्स्ट सेमेस्टर में ही बीए, बीएससी, बीकॉम की परीक्षाएं 06 अप्रैल से प्रस्तावित थीं। जो बाद में कोविड संक्रमण बढ़ने के कारण नहीं हो सकीं। पहले विश्वविद्यालय ने इसके लिए स्थिति सामान्य होने का इंतजार किया और बाद में शासन को प्रमोशन का प्रस्ताव भी भेजा। किंतु शासन भी इस मामले में कोई निर्णय नहीं ले सका। अब विश्वविद्यालय प्रशासन को समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करे? क्या सभी विद्यार्थियों को प्रमोट करे या बचे हुए विद्यार्थियों की भी परीक्षा आयोजित करे। जिन विद्यार्थियों का रिजल्ट जारी किया जा चुका है क्या वो अब कोई और निर्णय स्वीकार करेंगे? क्योंकि एक ही सेमेस्टर में आधे विद्यार्थियों के लिए अलग और आधे के लिए अलग निर्णय नहीं लिया जा सकता है।
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कोविड संक्रमण के कारण निश्चित रूप से यह विवि के सामने थोड़ी अजीब स्थिति है। हमने इस पर शासन से भी मार्गदर्शन मांगा था, उन्होंने विवि स्तर पर ही निर्णय लेने को कहा है। विश्वविद्यालय कार्य परिषद में चर्चा कर विद्यार्थियों के हित में बेहतर निर्णय लेगा।
- प्रो. आलोक कुमार राय, कुलपति, लविवि
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