लखनऊ। कोरोना वायरस सिर्फ लोगों को बीमार ही नहीं कर रहा बल्कि सेहत के साथ कई और तरह की समस्याओं का कारण बन रहा है। इनमें से एक बड़ी समस्या है रिश्तों में गहराती खाई। इसका सबसे बड़ा कारण है जिम्मेदारियों का बढ़ता बोझ और आर्थिक तंगी। डीसीपी महिला अपराध के यहां मई से जून में अब तक आने वाले कुल मामलों में 40 फीसदी मामलों में कारण आर्थिक ही है। विडंबना तो ये है कि महामारी ने जिस तरह से सब कुछ अनिश्चित कर दिया है, उससे भी हम कुछ सीख नहीं रहे और मेरा-तेरा, तेरा-मेरा में उलझे हुए हैं।
भाई के परिवार देखभाल बनी परेशानी का कारण
मई के अंत में डीसीपी महिला अपराध के यहां एक एप्लीकेशन आई। इसके मुताबिक, पति अपने परिवार के बजाय जेठानी व उनके बच्चों का खर्च उठा रहे हैं। हमारे खर्च में कटौती से परेशान हो रही है। काउंसिलिंग के लिए जब बुलाया गया तो पता चला कि कोरोना से भाई की मौत के बाद छोटे भाई ने भाभी व बच्चों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। इस पर पत्नी को आपत्ति है, खैर काउंसिलिंग चल रही है।
मायके में चला रही थी पार्लर, बंद हुआ तो मांगने लगी खर्चा
एक अन्य एप्लीकेशन में मायके में रहने वाली पत्नी ने पार्लर बंद होने पर खर्चा मांगा है। काउंसिलिंग के लिए बुलाया तो पति का कहना था कि निजी कंपनी में नौकरी थी जो छूट गई। दूसरे पत्नी ने भी इतने दिन तक पति को नहीं पूछा। पार्लर बंद होने के बाद उसे अपने हक की याद आई।
अप्रैल के बाद तेजी से बढ़ीं शिकायतें
काउंसलर स्वर्णिमा सिंह कहती हैं कि कोरोना की पहली लहर की बात करें तो सबसे बड़ी समस्या थी सबका साथ रहना, जिसके कारण घरेलू हिंसा की शिकायतें बढ़ी थीं। लोग परिवार परामर्श केंद्र व डीसीपी महिला अपराध के संपर्क कर रहे थे। इस बार अप्रैल में कोरोना घातक रूप में था, लेकिन मई शुरू होते ही शिकायतें बढ़ने लगीं। इस बार सबसे ज्यादा समस्या लोगों को आर्थिक तंगी की वजह से हुई है। मई में 24 मामले आए और जून के शुरुआती दस दिनों में छह शिकायतें आई हैं।
दिक्कतें बढ़ेंगी, महामारी से सबक लेना होगा
डीसीपी महिला अपराध व सुरक्षा प्रकोष्ठ रुचिता चौधरी कहती हैं कि कुटुंब प्रोजेक्ट के तहत इन सभी मामलों में काउंसिलिंग चल रही है। पुलिस अधिकारियों व काउंसलर की टीम लगातार इनसे संपर्क में हैं। चूंकि लॉकडाउन हटा है, ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अन्य प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए आवेदन करने वालों को बुलाया जा रहा है। तेजी से बढ़ते मामले संकेत दे रहे हैं कि कोरोना ने सामाजिक आर्थिक चुनौतियां पैदा की हैं और इसके चलते घरों में क्लेश बढ़ सकता है। आने वाले समय में रिश्तों की इन चुनौतियों के लिए हमें तैयार रहना होगा।