देहरादून निवासी दोस्त की बेटी को दस्तावेजों में हेराफेरी कर पत्नी बताने वाले को आखिरकार फैमिली कोर्ट में भी मुंह की खानी पड़ी। बुधवार को फैमिली कोर्ट ने पेपरमिल कॉलोनी निवासी विष्णु नारायणपुरी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
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साथ ही कहा कि उसके पास ऐसे कोई सुबूत नहीं जो यह साबित करें कि युवती उसकी पत्नी है। छह अगस्त 2013 को हनुमान मंदिर पूजा करने गई युवती पर शिवपुरी ने तेजाब फेंक दिया था। इस मामले में विष्णु को एडीजे कोर्ट पहले ही सात साल की कैद की सजा सुना चुका है और वह जेल में है।
फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश शिवशंकर प्रसाद ने कहा कि शिवपुरी ने दोस्त की बेटी के साथ धोखा किया और उसे अपनी पत्नी बताने की साजिश रची। इसके लिए उसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-9 का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश की।
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नहीं साबित कर सका कि पीड़िता पत्नी है
शिवपुरी शादी की जगह, फोटोग्राफ, रीति-रिवाज, शादी में कौन-कौन शामिल हुए जैसे कोई सुबूत पेश नहीं कर सका, जिससे उसका दावा सच साबित हो। इसके अलावा देहरादून जैसे शहर के प्रमुख व्यवसायी की बेटी की शादी गुपचुप और बिना वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के होना भी सवाल खड़े करता है।
शिवपुरी ने कोर्ट को बताया था कि 25 सितंबर 2006 को उसने युवती के साथ शादी की थी। युवती को पत्नी बताते हुए उसकी विदाई कराने के लिए वर्ष 2007 में पारिवारिक न्यायालय में मुकदमा दायर कर दिया। गढ़े गए सुबूत अदालत के ‘एसिड टेस्ट’ में टिक नहीं पाए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, पिता के दोस्त होने की वजह से लड़की शिवपुरी को चाचा का दर्जा देती थी। पर शिवपुरी ने चाचा-भतीजी के रिश्ते को तार-तार किया।
उसे पत्नी साबित करने के लिए इस तरीके से फोटो खिंचवाए, जैसे वे पति-पत्नी हों। जबकि ये फोटो घूमने-फिरने के समय खिंचवाए गए थे। इतना ही नहीं, जिन पत्रों को सुबूत के तौर पर पेश किया गया, वह भी साबित नहीं हो सके कि उन्हें युवती ने ही लिखा। आखिर कोई मर्जी से दोगुनी उम्र के आदमी से क्यों विवाह करना चाहेगी?
दोगुनी उम्र के व्यक्ति से क्यों करेगी शादी
विष्णु शिवपुरी ने खुद की उम्र भी घटाकर कोर्ट को 38 साल बताई, जोकि उस समय भी 45 साल से अधिक थी। वहीं नाबालिग लड़की को 19 साल का बताया गया। कोर्ट का कहना है कि कोई युवती अपनी मर्जी से भी दोगुनी उम्र के व्यक्ति से क्यों विवाह करना चाहेगी?
यह संशय पैदा करता है। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट ने 2010 में शिवपुरी के पक्ष में हुए एकतरफा आदेश को भी खारिज कर दिया। छह अगस्त 2013 को हनुमान मंदिर पूजा करने गई युवती पर शिवपुरी ने तेजाब फेंक दिया था। इससे युवती तो झुलसे से बच गई थी, लेकिन उसकी टी-शर्ट जल गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एडीजे कोर्ट ने 25 अगस्त 2014 विष्णु शिवपुरी को सात साल की सश्रम जेल और एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई थी। दोषी अभी जेल में बंद है।
कोर्ट से न्याय मिलने के बाद पीड़ित ने कहा शिवपुरी की साजिश को बेपर्दा करने के लिए सात साल तक मैंने लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। आखिरकार सच जीता।
उसने कहा, शिवपुरी की देहरादून में मेरे पिता से दोस्ती हो गई थी। लंबे समय तक उसका घर पर आना जाना रहा। इस दौरान पढ़ाई के लिए वह बेटी बनाकर मुझे लखनऊ ले आया, लेकिन यहां आने के बाद शादी के लिए दबाव बनाने लगा। इसके बाद मैं घर लौट गई तो फर्जी दस्तावेज लगाकर कोर्ट के जरिये मुझे पत्नी बताने की कोशिश की। दबाव बनाने के लिए तेजाब फेंक दिया।
पीड़ित पक्ष के वकील सुनील कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पारिवारिक न्यायालय ने युवती को अधेड़ की पत्नी होने के दावे को खारिज कर दिया है। खुद कोर्ट ने कहा कि विष्णु नारायण शिवपुरी गलत तरीके से युवती को पत्नी बताता रहा। अब यह साबित हो गया है कि युवती उसकी पत्नी नहीं है।