अध्यापकों के डुप्लीकेट अंक पत्र और डिग्री से तैनात फर्जी शिक्षकों के मामले में विशेष जांच दल (एसटीएफ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जुलाई 2018 के बाद से अभी तक किसी भी जिले में जांच पूरी नहीं हुई, इसलिए फर्जी शिक्षक स्कूलों में खुलेआम काम कर रहे हैं।
एसटीएफ ने बताया है कि बेसिक शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव प्रभात कुमार ने 20 जुलाई, 2018 को आदेश दिया था कि परिषदीय स्कूलों में वर्ष 2010 के बाद हुई सभी नियुक्तियों की जांच की जाए। हर जिले में अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई। इसमें अपर पुलिस अधीक्षक और सहायक मंडलीय शिक्षा निदेशक (बेसिक) सदस्य थे। प्रभात कुमार ने कोषागार से वेतन सूची प्राप्त कर यह चेक करने के निर्देश दिए थे कि जो शिक्षक कार्यरत है, वह चयन सूची में था या नहीं। जांच में तेजी न आने से फर्जी शिक्षक बेधड़क काम करते रहे।
फर्जी अंकतालिका से भी हासिल की डिग्री
एसटीएफ ने जांच में खुलासा किया है कि प्रदेश में बरेली, देवरिया, सिद्धार्थनगर सहित कुछ जिलों में अभ्यर्थियों ने स्नातक, स्नातकोत्तर, बीटीसी और टीईटी की फर्जी अंकतालिका के आधार पर भी नौकरी प्राप्त की है। सहायक अध्यापकों ने नियुक्ति पाने के बाद बीएसए दफ्तर के बाबू से सांठगांठ कर रिकार्ड से फर्जी अंकतालिका हटाकर अपनी मूल अंकतालिका लगा दी। ऐसे अभ्यर्थियों को पकड़ने के लिए एसटीएफ अब संबंधित भर्ती में डीएम की ओर से जारी अंतिम चयन सूची से क्रॉस चेक कर रही है। सिद्धार्थनगर में पकड़े गए 40 में से 32 शिक्षकों ने टीईटी की फर्जी अंकतालिका लगाई है।
विकलांग प्रमाण पत्रों की जांच हो
एसटीएफ ने परिषदीय स्कूलों में विकलांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों पर कार्यरत विकलांग सहायक अध्यापकों के विकलांगता प्रमाण पत्रों की जांच की आवश्यकता जताई है। एसटीएफ का मानना है कि आंशिक बधिर, आंशिक दृष्टिबाधित के फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर विकलांग कोटे में नौकरी पाई है।
सवा दो करोड़ रुपये महीने की बचत हुई
एसटीएफ का मानना है कि पहले दौर में 336 फर्जी अध्यापकों का खुलासा होने के बाद विभाग ने करीब तीन सौ अध्यापकों को बर्खास्त कर दिया है। फर्जी शिक्षकों के बर्खास्त करने से विभाग को हर महीने करीब दो करोड़ रुपये की बचत हुई है। एसटीएफ का मानना है कि यदि फर्जी शिक्षकों से गंभीरता से वसूली की गई तो सरकार को करोड़ों रुपये मिलेंगे।