अपर मुख्य सचिव ने फर्जी नियुक्तियों की जांच प्रक्रिया से बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अलग रखा है। छह वर्ष की अवधि के दौरान इन जिलों में कार्यरत रहे बीएसए अब भी अन्य जिलों में बीएसए सहित महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। यदि बीएसए को जांच कमेटी में शामिल रखा जाता तो जांच प्रभावित हो सकती थी।
मथुरा से खुला था मामला
परिषदीय विद्यालयों में फर्जी सहायक अध्यापक नियुक्ति का मामला मथुरा से खुला था। निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने मथुरा की जांच रिपोर्ट में अन्य जिलों में भी फर्जी सहायक अध्यापकों की नियुक्ति की आशंका जताई थी।