गलत सूचना के लिए बदनाम सोशल मीडिया ने अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को निशाना बनाया है।
फेसबुक सहित कई ब्लॉग साइट पर एक सूचना तेजी से फैली कि एक जनवरी 2014 से बैंक नोट पर कुछ भी लिखा होने पर जमा नहीं करेंगे। यह झूठ सामने आ गया है।
सरकारी और निजी बैंक के अधिकारियों ने खुद ऐसे नोट ग्राहक से नहीं लिए जाने की सूचना का खंडन किया है।
बैंकों का कहना है कि एक जनवरी के बाद भी ऐसे नोट चलन में रहेंगे। सरकारी और निजी क्षेत्र की बैंक के अधिकारियों ने साफ किया कि यह सूचना गलत तरीके से प्रसारित की गई।
अभी तक आरबीआई से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। कोई सर्कुलर भी नहीं आया है। अब बैंकों ने ग्राहकों तक सही सूचना पहुंचाने की कवायद शुरू कर दी है।
निजी क्षेत्र की एचडीएफसी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लोग हमारी ब्रांचों में लिखे नोट लेकर आ रहे हैं। वह बदले में नए नोट मांग रहे हैं।
स्टाफ से पता चला कि ग्राहक एक जनवरी से नोट बंद किए जाने की बात कह रहे हैं। उन्हें आश्वस्त कर भेजा जा रहा है। साथ ही आरबीआई की ही ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ में खराब नोट को बदलकर हम नए नोट और सिक्के दे रहे हैं।
वहीं, सरकारी उपक्रम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक आरसी गुप्ता का कहना है कि करेंसी तैयार करने में काफी खर्च करना होता है।
एक नोट खराब होने पर उससे कहीं ज्यादा कीमत नया नोट बनाने में लगती है। 10 रुपये का नोट करीब 50 रुपये की कीमत में तैयार होता है।
इसकी वजह विदेशों से आयातित होने वाला विशेष करेंसी पेपर है। उधर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के क्षेत्रीय प्रबंधक सीपी वर्मा ने कहा कि हमारे पास अभी तक कोई सूचना एक जनवरी से लिखे नोट लेना बंद करने की नहीं है।
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