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डिग्री न पढ़ाई, पर खानदानी पेशा है डॉक्टरी!

Fri, 09 Feb 2018 10:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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इस तरह से चल रहा खानदानी दवाखाना। - फोटो : amar ujala
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यह विडंबना ही है कि प्रदेश की राजधानी में ही गोरखधंधा करने वाले फलफूल रहे हैं। जिम्मेदारों का लचर रवैया इन्हें और बढ़ावा दे रहा है। खामियाजा भुगत रहे हैं आम नागरिक। ग्रामीण इलाके ही नहीं अब तो शहरी इलाकों में भी झोलाछाप बंगाली तो कहीं खानदानी दवाखाना चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की नींद तब टूटती है, जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है।
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सीएमओ ने इनके खिलाफ जांच का जिम्मा सीएचसी के प्रभाविरों को दिया है, पर आज तक किसी ने भी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नहीं भेजी। जिम्मेदारों पर कार्रवाई के बजाय सीएमओ ऑफिस भी सिर्फ इन्हें रिमांडर भेजकर ही चुप बैठा है। राजधानी में किस तरह से झोलाछाप मनमानी दवाखाना चला रहे हैं, इस पर एक रिपोर्ट-

डिग्री आयुर्वेद की, चलाते हैं ट्रामा सेंटर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल

- फोटो : demo
पीजीआई इलाके में कई ऐसे बीएएमएस मिल जाएंगे जो न केवल एलोपैथ पद्धति से इलाज कर रहे, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए ट्रॉमा सेंटर, एन्यूरो अबर्न यूनिट, आईसीयू व स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल भी चला रहे हैं। यहीं नहीं यहां बड़े ऑपरेशन और डायलिसिस तक की सुविधा मौजूद है। चरन भट्ठा रोड स्थित भी ऐसा ही क्लीनिक बीएएमएस डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। बीएएमएस है, लेकिन बोर्ड एमबीबीएस का लगवा रखा है। रायबरेली रोड स्थित एक अन्य अस्पताल है, जहां सारा इलाज फिजियोथेरेपिस्ट के भरोसे चल रहा है।

सर्जरी से मौत के दोषी, फिर भी चला रहे बंगाली क्लीनिक
 मोहान रोड के खुशहाल गंज में इस बंगाली क्लीनिक में बवासीर व भगंदर से लेकर सभी तरह की फोड़ा-फुंसी के ऑपरेशन किए जाते हैं। पर ऑपरेशन करने वालों के पास कोई डिग्री नहीं। खास बात है कि इलाज की गारंटी लेकर खुलेआम मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जाता है। यहां आपरेशन के दौरान मौत भी हो चुकी है और कई बार हंगामा भी हुआ।

झोपड़ी में इलाज, ट्रेनिंग खानदानी स्कूल में ली

- फोटो : demo
राजाओं के समय का हवाला देते हुए इटौंजा माल रोड के मरपा गांव में ऐसा ही एक ऐसा क्लीनिक चल रहा है, जहां झोपड़ी में इलाज होता है। इतना ही नहीं ये तथाकथित फर्जी डॉक्टरों का दावा है कि उनकी ट्रेनिंग खानदान में होती है, यानी खानदानी पेशा है यह। हड्डियों के इलाज की यह क्लीनिक पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल रही है। यहां एक दिन में 200 तक मरीज आते हैं। तीन साल पहले तत्कालीन सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव ने यहां छापा मारा था और केस भी दर्ज कराया था। इसके बावजूद यह फर्जी अस्पताल आज तक बंद नहीं हुआ। सीएचसी इटौंजा के प्रभारी डॉ. संदीप सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। कार्यवाही की जाएगी। एसडीएम निधि गुप्ता वत्स ने भी कार्यवाही की बात कही है।

यहां तो गुमटी में ही खोल ली क्लीनिक
मलिहाबाद के रुसेना गांव चौराहे पर एक लकड़ी की गुमटी में दुकान सजाए बैठे झोलाछाप सुंदर लाल इसी गांव के निवासी हैं। हाईस्कूल पास हैं और रोज 15 से 20 मरीज देखते है। इनका दावा है कि डिग्री भले ही न हो लेकिन एक निजी अस्पताल में तीन साल प्रैक्टिस के बाद गांव के बाहर एक गुमटी में अस्पताल खोला है। थोड़ा आगे चैना गांव के चौराहे पर एक दुकान में टेबल कुर्सी डाल कर बैठे झोलाछाप बताते हैं कि उनके पास बीएससी की डिग्री है। पांच साल प्रैक्टिस के बाद अस्पताल खोल दिया है, 20 से 25 मरीज रोज देखते है।

फायदा हुआ तो ठीक, वरना भेज दिया शहर

- फोटो : demo
दुबग्गा मार्ग के जल्लाबाद में चल रही एक क्लीनिक में हाइड्रोसील से लेकर गर्भपात व अन्य सर्जरी भी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग गलत इलाज के चलते जान गंवा चुके हैं। वहीं इन झोलाछापों का फंडा यह है कि इलाज से फायदा हो गया तो ठीक, वरना हालत बिगड़ने पर शहर रवाना कर देते हैं।
 
इनके झोले में है हर मर्ज का इलाज
नगराम के हरदोइया में झोलाछाप आयुर्वेदिक एलोपैथी व होम्योपैथी सभी विधि से मरीजों का इलाज करने में माहिर होने का दावा करते हैं। बहरौली गांव में भी इन डाक्टरों की दुकाने संचालित हो रहीं हैं। निंगोहा मार्ग पर राजनरायन जायसवाल इंटर कॉलेज के सामने एक क्लीनिक को सील भी किया गया था। नगराम सीएचसी अधीक्षक डाक्टर शिवचरन से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मेरी जल्द ही तैनाती हुई है। झोलाछाप के बारे में पता कर कार्यवाही की जाएगी।
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अवैध क्लीनिकों को चिह्नित करने के दिए निर्देश: एसीएमओ

- फोटो : demo
मामले पर एसीएमओ डॉ. आरके चौधरी का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसके लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को झोलाछाप डॉक्टरों व अवैध क्लीनिकों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। आज फिर इसके लिए रिमाइंडर भेजा गया है।
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