राजधानी में एक निजी बैंक के पांट एटीएम बूथों से 2000 रुपये के जाली नोट निकलने का बड़ा मामला सामने आया है। खास बात है कि सभी नोटों पर एक ही नंबर पड़ा है। बैंक ने एटीएम में रुपये भरने वाली सीएमएस इन्फोसिस्टम लिमिटेड कंपनी से संपर्क किया तो हड़कंप मच गया।
कंपनी का ऑफिस विभूतिखंड के हनुमंत कृपा बिल्डिंग में है। जांच के बाद कंपनी के शाखा प्रबंधक अनिल कुमार सिंह की तरफ से विभूतिखंड थाने में सोमवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है।
प्रभारी निरीक्षक राजीव द्विवेदी ने बताया कि सीएमएस इन्फोसिस्टम कंपनी देशभर में एटीएम में रुपये भरने का काम करती है। बीते महीने निजी बैंक ने कंपनी को सूचना दी कि उसके कुछ एटीएम बूथ से उपभोक्ताओं को जाली नोट मिल रहे हैं।
कंपनी ने तत्काल मुंबई मुख्यालय में संपर्क कर निजी बैंक के लखनऊ स्थित सभी एटीएम बूथ का ऑडिट शुरू कराया। ऑडिट टीम में सीएमएस इन्फोसिस्टम की तरफ से अंकित कुमार शुक्ला व प्रवीण कुमार श्रीवास्तव और यूरोनेट कंपनी के मृदुल शाह, आशीष, पदम भी थे।
ऑडिट में निजी बैंक के उन एटीएम बूथ का पता चला गया जहां से जाली नोट निकले थे। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि कंपनी को 2000 रुपये के कुल 213 जाली नोट मिले हैं। नोटों को जांच के लिए कंपनी ने वॉल्ट में सुरक्षित रख लिया है। जाली नोट कहां से आए? ऐसे नोट एटीएम तक कैसे पहुंचे? पुलिस इस बारे में जानकारी जुटा रही है।
इन एटीएम बूथ से निकले थे जाली नोट
प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि निजी बैंक के पांच एटीएम बूथों के ऑडिट में पता चला कि जाली नोट राजधानी के पांच एटीएम से मिले हैं। सबसे ज्यादा 70 जाली नोट जानकीपुरम के सेक्टर जी स्थित निजी बैंक के एटीएम बूथ से मिले। जानकीपुरम के ही सेक्टर वन स्थित एटीएम बूथ से 67, सरोजनीनगर के कुदरतविहार गौरी स्थित बूथ से 57, रिंग रोड कल्याणपुर स्थित एटीएम बूथ से 13 और डालीगंज पुल के नीचे स्थित सिकंदरपुर मार्केट के एटीएम बूथ से छह जाली नोट निकले थे।
एक ही सीरिज के हैं सारे जाली नोट
शुरुआती पड़ताल में खुलासा हुआ है कि सभी जाली नोट की सीरीज एक ही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सारे जाली नोट का सीरियल नंबर 2बीवी401370 है। यानी जिसने भी नोट बनाए हैं, उसने एक ही नोट से कॉपी की है।
स्कैन करके जाली नोट बनाने की आशंका
पुलिस सूत्रों ने बताया कि एटीएम बूथ से जो नकली नोट मिले हैं, वह स्कैन करके बनाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि 2000 रुपये के नोट दो साल पहले ही शुरू हुए हैं। ऐसे में इतनी जल्दी इन नोटों की डाई बनाना संभव नहीं है। चूंकि नोटों की संख्या बहुत कम है ,इसलिए इसके पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अथवा अन्य राष्ट्रविरोधी ताकतों का हाथ भी नहीं लग रहा। ऐसा लग रहा है किसी शातिर ने असली नोट को स्कैन करके जाली करेंसी तैयार की है। फिलहाल नोटों की विशेषज्ञों से जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होती है रुपये भरने की प्रक्रिया
सीएमएस कंपनी के शाखा प्रबंधक अनिल कुमार सिंह का कहना है कि एटीएम में रुपये भरने की प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होती है इसलिए कंपनी की तरफ से कोई गड़बड़ी होने की आशंका न के बराबर है। उन्होंने बताया कि कंपनी यूरोनेट कंपनी से इंडेंट प्राप्त करती है तथा बैंक के करेंसी चेस्ट से रुपये लेकर एटीएम मशीन में भरती है। 2000 रुपये के बंडल सील पैक होते हैं। सारा रुपया सीएमएस कंपनी के वॉल्ट में रखा जाता है या फिर सीधे एटीएम मशीन में भर दिया जाता है। कंपनी के कस्टोडियन सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में एटीएम मशीन में रुपया भरते हैं। उन्होंने बताया कि नकली नोट अलग-अलग रूट में पाए गए हैं जो चिंताजनक है। इसके पीछे कोई आर्थिक अपराध की सुनियोजित साजिश की आशंका लग रही है। उन्होंने पुलिस से गहराई से जांच की मांग की है।