राष्ट्रपति ने सेना के जिस अफसर को सम्मान से नवाजा था, दंगे में पुलिस ने उसे भी लपेट दिया।
इतना ही नहीं रिटायर ऑनरेरी कैप्टन पर फुगाना थाने में छह मुकदमे दर्ज कर दिए गए।
मामला खुला तो आईजी आशुतोष पांडे ने मुकदमे की धारा बदलने के आदेश दिए हैं।
लांक गांव के निवासी ओमपाल सिंह वर्ष 2008 में सेना के ऑनरेरी कैप्टन पद से रिटायर होकर गांव में खेतीबाड़ी कर रहे हैं।
आठ सितंबर को हुई हिंसा में लांक गांव में भी बड़ी तादाद में जान-माल की हानि हुई। फुगाना पुलिस ने छह मुकदमों में ओमपाल सिंह को भी नामजद कर दिया।
उन पर हत्या, बलवा, आगजनी जैसी संगीन धाराएं लगाई गईं। इतना ही नहीं उनके नाबालिग बेटे मोहित को भी दो मुकदमों में नामजद किया गया है।
ओमपाल को 6 बटालियन जाट रेजीमेंट में रहते हुए राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने सराहनीय सेवाओं के लिए पुरस्कृत किया था।
सूबेदार से वह ऑनरेरी कैप्टन पद तक पहुंचे और नागालैंड से सेवानिवृत्त हुए। बुधवार को पुलिस लाइन पहुंचे ओमपाल सिंह ने आईजी आशुतोष पांडे को अपने पदक और प्रशस्ति पत्र दिखाए।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुसलिम परिवार को 5.75 लाख रुपये उधार दे रखे थे। पैसा न लौटाना पड़े इसी लिए उन्हें नामजद करा दिया गया।
आईजी ने पूरे मामले की जांच कराने और धाराओं में परिवर्तन करने के निर्देश विवेचक को दिए हैं।
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