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नकली खून बनाने पर 2100 खर्च, मुनाफा 7900 रुपये का, पढ़ें कैसे होता है 'गंदा धंधा'

Sat, 27 Oct 2018 11:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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 खून के काले कारोबारी करीब चार गुना मुनाफा कमाते थे। ‘अमर उजाला’ टीम ने जब इस काले कारोबार के अर्थशास्त्र को खंगाला, तो बेहद चौंकाने वाली बातें सामने आईं। महज 2100 रुपये खर्च कर एक यूनिट ब्लड को दो यूनिट बनाया जाता था। इस दो यूनिट ब्लड को दस हजार रुपये में आसानी से बेच देते थे। इस काली कमाई में कौन-कौन हिस्सेदार होते थे, पेश है उसकी पूरी गणित...
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पहले जान लीजिए 2100 की गणित
- पेशेवर खून बेचने वाला : सबसे पहले उसकी बात, जहां से यह खून मिलता है। ये वो शख्स होता है जो आदतन और पैसे के लिए अपना खून बेचता है। नशेड़ी, मजबूर लोग इसमें शामिल होते हैं। उसे एक यूनिट ब्लड के पांच सौ रुपये दिए जाते हैं।

- दलाल या बरगला कर लाने वाला : खून बेचने वाले को लाने वाले को तीन सौ रुपये दिए जाते हैं। इस शख्स का काम होता है कि ऐसे लोगों की तलाश करना और उन्हें ब्लड बैंक तक पहुंचाना।
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- बैग : बैग यानी जिसमें ब्लड जमा लिया जाता है। एक बैग की कीमत पांच सौ रुपये है। एक यूनिट ब्लड से दो यूनिट बनाने पर दो बैग इस्तेमाल होते हैं। इस तरह से 1000 रुपये बैग पर खर्च किए जाते थे। 

- खून निकालने वाला कर्मचारी : हर यूनिट ब्लड पर उस कर्मचारी का भी हिस्सा होता है जो खून निकालता है। उसे दो सौ रुपये प्रति यूनिट दिए जाते हैं।
सेलाइन वाटर : आसान शब्दों में कहें तो नमकीन पानी। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो ऐसा पानी जिसमें सोडियम क्लोराइड मिला होता है। सेलाइन वाटर पर 100 रुपये खर्च किए जाते हैं।
 

मिलावट न हो तो 1500 खर्च, 5000 रुपये में बिक्री 

गिरफ्तार किए गए आरोपी। - फोटो : amar ujala
अगर ये धंधेबाज मिलावट नहीं करते हैं तो एक बैग का कम इस्तेमाल होता है, जिससे खर्च में 500 रुपये की बचत होती है। वहीं सेलाइन वाटर के भी 100 रुपये बच जाते हैं। ऐसे में पूरा खर्च महज 1500 रुपये आता है। एक यूनिट ब्लड को निजी अस्पतालों के मरीजों को 5000 रुपये में बेचा जाता। इस पर 3500 रुपये का मुनाफा कमाते हैं।

नेगेटिव ब्लड ग्रुप तो मुंहमांगी कीमत
ब्लड बैंक से जुड़े सूत्रों की मानें तो नेगेटिव ब्लड ग्रुप का पेशेवर खून बेचने वाला मिलने पर दोगुनी कीमत दी जाती है। कई बार नेगेटिव ग्रुप के रक्तदाताओं को उनकी मांग के मुताबिक, कुछ दवाएं, खाने-पीने के सामान भी उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि नेगेटिव ग्रुप का ब्लड मुंहमांगी कीमत पर बिक जाता है।
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खून के लिए तय सरकारी मूल्य

ये पांच आरोपी हुए गिरफ्तार - फोटो : amar ujala
सरकारी दर के हिसाब से प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीज से ब्लड बैंक प्रति यूनिट 1250 रुपये ले सकते हैं। चूंकि केजीएमयू में न्यूक्लियर एसिड टेस्ट वाला ब्लड दिया जाता है, इसलिए वहां दो हजार रुपये लिए जाते हैं। प्राइवेट ब्लड बैंकों पर भी यही नियम लागू होता है। यहां भी बिना डोनर के ब्लड देने पर मनाही है, लेकिन पैसे लेकर ब्लड उपलब्ध कराया जाता है।
 
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