फैजाबाद सीट से विजयी प्रत्याशी अवधेश प्रसाद।
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भाजपा के राम मंदिर कार्ड पर इस बार समाजवादी पार्टी का पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) कार्ड भारी रहा। शहर से लेकर अंदर ही अंदर हुए ध्रुवीकरण ने भाजपा की हर चाल नाकाम कर दी और हर क्षेत्र में साइकिल हावी रही। नतीजतन भाजपा के भगवा किले को ढहाने में सपा सफल रही।
समाजवादी पार्टी ने सामान्य सीट पर दलित कार्ड खेलकर सभी को चौंकाया था। खांटी समाजवादी होने के साथ ही राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाने वाले अवधेश प्रसाद का पूरा फोकस पीडीए की थीम पर ही रहा। इसी थीम पर वह चलते रहे और भीतर ही भीतर उन्होंने मजबूत चुनाव खड़ा कर दिया।
उन्होंने न कोई शोर-शराबा किया ना ही कोई दिखावा। यहां तक कि रोड-शो के तय हुए कार्यक्रम भी करवाने में वह दिलचस्प नहीं दिखे। ऐसे में भाजपाइयों को इतने मजबूत चुनाव का अंदाजा भी नहीं लगने दिया।
इधर, राम मंदिर बनने के बाद भाजपाई खेमा राम के सहारे जीत को लेकर आश्वस्त था। आस्था के आधार पर वोट की चोट की आशा थी। इसे गर्माने के तमाम अभिनव प्रयोग भी होते रहे। शीर्ष नेताओं को भी गणेश परिक्रमा कराई गई। लेकिन भाजपा की एक भी चाल सपा के पीडीए कार्ड के सामने काम न आई।
जनसंपर्क में दलित व पिछड़ा बाहुल्य इलाकों में सपा का रहा फोकस
दलित, पिछड़ा बाहुल्य इलाकों में सपा तेजी से लगकर चुनाव खड़ी करती रही। मतदाताओं को मथती रही, जिसका परिणाम मंगलवार को सामने आया। सपा के मूल मतों के साथ दलित व अन्य पिछड़ी जातियों के मतों को साधकर चुनावी वैतरणी को पार करने में अवधेश सफल रहे। साथ ही शीर्ष नेतृत्व के दलित कार्ड के फैसले को भी उन्होंने सार्थक सिद्ध कर दिया।
सुबह से माला पहनकर मतगणना स्थल में जमा रहे अवधेश
अवधेश प्रसाद सुबह से ही आत्मविश्वास से लबरेज दिखे। हनुमानगढ़ी व पंचमुखी महादेव के दर्शन के दौरान पहनी माला धारण किए ही वह मतगणना स्थल पहुंचे थे और पूरे समय वह माला पहने रहे। किसी ने टोका भी तो आत्मविश्वास से भरे हुए उन्होंने जवाब दिया कि यह जीत की माला है, जिसे भगवान ने ही पहनाकर भेजा है।