टीम के साथ मौके पर पहुंचीं बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. संगीता शर्मा व सुधा रानी ने बच्चों से बातचीत कर उनके परिजनों को थाने बुलाया। इनमें से दो बालिकाओं की उम्र 18 साल से अधिक है।
दोनों लड़कियों को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। संगीता शर्मा का कहना है कि इनमें से कुछ बच्चे एक साल से तो कुछ दो-तीन महीने पहले से कारखाने में काम कर रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान इन बच्चों से काम कराया जा रहा था। डॉ. संगीता शर्मा ने बताया कि सभी बच्चों के घरवालों से बॉन्ड भराया गया है। ये सभी बच्चे 14 दिन तक अपने घर पर ही क्वारंटीन में रहेंगे। उसके बाद उनका आयु परीक्षण किया जाएगा। संगीता शर्मा ने बताया, बाल गृह में क्वारंटीन की कोई व्यवस्था नहीं है।
रेस्क्यू कराए गए बच्चों में एक बालक सीतापुर का रहने वाला है। जो अकेला ही फेक्टरी में रहता था। उसके लिए सीडब्ल्यूसी ने आदेश दिया कि उसे राजकीय बाल गृह बालक मोहान रोड में आश्रय दिलाया जाए।
साथ ही 14 दिनों तक अलग रखा जाए। संगीता शर्मा ने कहा कि बाल गृह के अधीक्षक ने आदेश की अवमानना करते हुए उसे रखने से मना कर दिया। उस बालक को चाइल्डलाइन कार्यालय में ही रखा गया है। हालांकि चाइल्ड लाइन की टीम देर रात तक उसे भेजवाने की कोशिश में जुटी हुई थी।
प्रभारी निरीक्षक बाजारखाला विजयेंद्र सिंह ने कहा, चाइल्ड लाइन की टीम ने बाल श्रम करते पकड़ा था। पुलिस के सहयोग से बच्चों को मुक्त कराया गया। चाइल्ड लाइन की टीम ने तहरीर देने को कहा था लेकिन देर रात तक तहरीर नहीं मिली।
तहरीर मिलते ही आरोपी फैक्टरी मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। वहीं पुलिस ने लॉकडाउन उल्लंघन और महामारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर लिया है।