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Lucknow News: नेत्रदान से 145 जिंदगियों में छंटा अंधेरा, लौटी रोशनी

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लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के आई बैंक में बीते सात महीनों में दान की गई कॉर्निया से 145 लोगों की आंखों का अंधेरा दूर हुआ। अब ये मरीज दुनिया को देख पा रहे हैं और सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, इस दौरान मिली 214 कॉर्निया में से 69 प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं मिलीं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, नेत्रदान के बाद मिलने वाली हर कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं होती। समय पर सूचना नहीं मिलने, कॉर्निया की गुणवत्ता खराब होने, संक्रमण और प्रिजर्वेशन में देरी के कारण कई कॉर्निया को रिजेक्ट करना पड़ता है। आमतौर पर डोनेट की गई करीब 50 फीसदी कॉर्निया ही प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल हो पाती हैं।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की पांचवीं मंजिल पर स्थित आई बैंक प्रदेश का सबसे बड़ा आई बैंक है। यहां हर महीने करीब 15 से 20 कॉर्निया का कलेक्शन किया जाता है। नेत्र रोग विभाग की प्रमुख डॉ. अपजीत कौर ने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को रोशनी मिल सकती है। उन्होंने अपील की कि परिजन की मृत्यु के छह घंटे के भीतर 1919 या 6390826826 पर संपर्क कर नेत्रदान की सूचना दें। आई बैंक में 22 लोगों ने कॉर्निया दान के लिए पंजीकरण कराया है।
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पोस्टमार्टम हाउस से मिलीं 172 काॅर्निया
जनवरी से जुलाई तक आई बैंक को करीब 214 काॅर्निया मिलीं। सबसे अधिक 172 कॉर्निया पोस्टमार्टम हाउस से मिलीं। जून में 37 व जुलाई में 34 काॅर्निया मिली हैं। इनमें कई लावारिस शवों की कॉर्निया थीं। जिन शवों के परिजनों ने सहमति दी, उनकी कॉर्निया भी ली गई।
डोनेशन से मिलीं 109 काॅर्निया
जनवरी से जुलाई के बीच 109 कॉर्निया सीधे डोनेशन के जरिये मिलीं। इनमें जून में सबसे अधिक 21 और जुलाई में 20 कॉर्निया मिलीं। मई में 15, अप्रैल में 14, मार्च में 13, फरवरी में 12 और जनवरी में 14 कॉर्निया दान से मिलीं।
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