गुडंबा के बेहटा में रविवार सुबह हुआ भयावह हादसा कोई पहली बार नहीं हुआ। बीते पांच वर्ष में इस गांव में छोटे-बड़े मिलाकर इस तरह के चार हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद घरों में पटाखे बनाने का धंधा बंद नहीं हुआ।
बेहटा गांव में पटाखों में विस्फोट से जान गंवाने वाले आलम के घर से कुछ दूरी पर रामचंद्र का घर है। उन्होंने बताया कि इस रिहायशी इलाके में कई लोग काफी समय से घर में पटाखे बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि गांव में वर्ष 2020 से लेकर अब तक चार बार पटाखे के कारण घरों में विस्फोट की घटनाएं हो चुकी हैं। पहले भी एक महिला की जान जा चुकी है।
शिकायत के बावजूद पुलिस ने नहीं दिया ध्यान
ग्रामीण इदरीश ने बताया कि गांव में काफी समय से पटाखा बनाने का कारोबार हो रहा है। कई बार लोगाें ने शिकायत भी की, मगर न पुलिस और प्रशासन ने कुछ नहीं किया। हर समय लोगों को अपनी जान जाने का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि आज दो लोगों की जान गई है। इसी तरह पटाखे बनते रहे तो और भी लोग हादसे के शिकार बन जाएंगे।
15 से 20 घरों में बन रहे पटाखे
एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव में एक-दो नहीं बल्कि 15 से 20 घरों में लोग चोरी छिपे पटाखे बनाने का कारोबार कर रहे हैं। विरोध करने पर ये लोग मिल जाते हैं और अभद्रता व गाली-गलौज करने लगते हैं। पहले चार बार हुए हादसों में दर्जन भर लोग घायल हुए थे। इसके बावजूद किसी ने कोई सबक नहीं लिया। (संवाद)
बेहटा में धमाका।
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