लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को दर्द से कराह रहे मरीज को डोट्रोवेरीन इंजेक्शन लगाने ही जा रहे थे तभी साथ आए तीमारदार की उसपर नजर पड़ गई। इस इंजेक्शन की उत्पादन की तिथि 5 मई 2017 दर्ज थी, जबकि अप्रैल 2019 में यह एक्सपायर हो चुका था।
वैक्सीन बॉक्स के बगल में रखे डिब्बे में देखा तो उसमें जितने इंजेक्शन थे सभी एक्सपायर्ड थे। नाराजगी जताने के बाद स्टाफ नर्स ने डिब्बे को वहां से हटाकर उसे नष्ट कराया। एक तीमारदार की सतर्कता से उसके मरीज को एक्सपायर्ड इंजेक्शन देने से बचा लिया गया लेकिन सवाल यह है कि इससे पहले यानी सुबह से कितने लोगों को यह इंजेक्शन लगाया गया होगा।
इस सवाल का जवाब जिम्मेदार नहीं दे रहे हैं। हालांकि अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन का कहना है कि कोई साजिश के तहत एक्सपायर्ड इंजेक्शन का डिब्बा रख गया है। इसकी जांच कराई जाएगी।
साजिश या लापरवाही : पिछले साल ओटी में मिले थे एक्सपायर्ड इंजेक्शन
बलरामपुर अस्पताल की न्यू बिल्डिंग में स्थित ऑपरेशन थिएटर ओटी में पिछले साल 22 अगस्त को एक्सपायर्ड वैक्सीन ओटी की मेडिसिन टेबल पर एनेस्थीसिया लिग्नोकेन एंड एड्रिनेलिन और डोब्यूटामाइन के एक्सपायर्ड इंजेक्शन मिले थे। तब भी आरोप लगे थे कि इसके बावजूद उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। इसे लेकर अस्पताल की खूब किरकिरी भी हुई, मगर अफसर मामले को दबा गए।
तीन दिन से इमरजेंसी मेडिसिन टेबल पर रखा था डिब्बा
डिब्बे को हटाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी में कई वैक्सीन का संकट
इमरजेंसी में मरीज का ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए लगने वाला लेसिक्स इंजेक्शन समेत कई अन्य वैक्सीन नहीं हैं। तीमारदारों को बाहर मेडिकल स्टोर से वैक्सीन लाना पड़ता था। अभी कुछ दिन पूर्व तक रेनेटेक वैक्सीन नहीं थी। कई बार डिमांड भेजने बाद एलपी जरिये उसे मंगाया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि दवाओं की कमी को दूर किया जा रहा है।
कृष्णानगर के रहने वाले गौरव बहन गरिमा को लेकर तीन दिन पहले इमरजेंसी गए थे। उसे पेट में असहनीय दर्द हो रहा था। डॉक्टर की सलाह पर मरीज को यह इंजेक्शन देर रात लगाया गया था। काफी देर तक इंतजार बाद भी मरीज को कोई राहत न मिली। इसके बाद तीमारदार मरीज को लेकर वापस चले गए। तीमारदार का आरोप है कि मरीज को लगाए गए इंजेक्शन से कोई फायदा नहीं हुआ था।
कराई जाएगी जांच
डेमो
निदेशक डॉ. राजीव लोचन का कहना है कि इमरजेंसी में रखा गया एक्सपायर इंजेक्शन किसी भी मरीज को नहीं लगा है। उनका दावा है कि यह साजिश के तहत रखवाया गया था। एक्सपायर इंजेक्शन किसी भी मरीज को लगा होता तो उसका दुष्प्रभाव भी नजर आता।
अस्पताल में बीते साल सितंबर में ड्रोटाविरीन इंजेक्शन आया था। इसकी एक्सपायरी डेट 2020 तक है। इमरजेंसी में कोई साजिश के तहत एक्सपायर्ड इंजेक्शन का डिब्बा रख गया होगा। मामले की जांच कराई जा रही है। - डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल