बसों की जिम्मेदारी संविदा चालकों को दे दी गई
हादसे के बाद संविदा चालकों की कार्यशैली व नियमित बस चालकों के कामकाज के तरीकों को लेकर परिवहन निगम मुख्यालय में चर्चा तेज है। इसमें सामने आया कि अनुभवी बस चालक मुख्यालय में ड्यूटी फरमा रहे हैं। प्रवर्तन टीम के वाहनों की कमान इन्हें सौंपकर रोडवेज बसों की जिम्मेदारी संविदा चालकों को दे दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि नियमित चालक बसों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने में पूरी सतर्कता बरतते हैं। उधर, संविदा चालक बसें चलाने में लापरवाही करते हैं। इसका एक कारण कम वेतन भी है। पुराने संविदा चालकों को 18000 रुपये तक मिल जाते हैं, लेकिन नए संविदा चालक 15 हजार रुपये तक ही कमा पाते हैं। इनका वेतन बढ़ाने की मांग भी उठती रही है।
एक हजार से अधिक बसों का बेड़ा
परिवहन निगम के लखनऊ परिक्षेत्र में एक हजार से अधिक बसों का बेड़ा है। अधिकारी बताते हैं कि यहां कैसरबाग, उपनगरीय, हैदरगढ़, रायबरेली, अवध व चारबाग डिपो हैं। इन डिपो में करीब 800 नियमित व 1500 के आसपास संविदा चालक हैं। सूत्र बताते हैं कि जो नियमित बस चालक शारीरिक रूप से अक्षम हो गए हैं व जिनकी आंखों की रोशनी कम हो गई है, उन्हें मुख्यालय में ड्यूटी दी गई है। ये चौकीदारी, डीजल भरने जैसे काम कर रहे हैं। ऐसे ड्राइवरों की संख्या 250 से अधिक है। इस कारण नियमित बस चालकों की संख्या कम हो गई है।
संविदा पर भर्ती से पहले होता है टेस्ट
रोडवेज के अधिकारी बताते हैं कि संविदा चालकों की भर्ती प्रक्रिया पुख्ता है। उनके पास भारी वाहन चलाने का तीन वर्ष पुराना लाइसेंस होना अनिवार्य है। भर्ती के दौरान डिपो में वाहन चलवाकर देखा जाता है। साथ ही प्रशिक्षण दिया जाता है। सात दिन तक बसों में ड्यूटी दी जाती है, ताकि यात्रियों से व्यवहार और बस संचालन की बारीकियां समझ सकें। फिर उन्हें कानपुर स्थित वर्कशॉप भेजा जाता है, जहां दो दिन का टेस्ट होता है। समय-समय पर इनकी काउंसिलिंग व मेडिकल जांच भी कराई जाती है।
दर्ज किया जा चुका है मुकदमा
काकोरी बस हादसे में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी ने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। शनिवार को अफसर थाने पहुंचे तो एसओ ने बताया कि पहले ही मुकदमा दर्ज हो चुका है। एक प्रकरण में दो एफआईआर नहीं की जा सकती।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी ने बताया कि संविदा चालक भी गंभीरता से बसें चलाते हैं। उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। कई नियमित चालक मुख्यालय में वीआईपी कार, प्रवर्तन दल की गाड़ियां चला रहे हैं।