सूबे के सहायता प्राप्त स्कूलों में जरूरत से अधिक
रखे गए शिक्षकों की जल्द छुट्टी होगी। इन स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों का
वेतन रोक दिया गया है। अब बेसिक के एडेड स्कूलों में ऐसे शिक्षकों की गिनती
कराई जा रही है।
राज्य सरकार समय-समय पर मान्यता प्राप्त निजी
स्कूलों को अनुदान पर लेती है। अनुदान पर लिए गए स्कूलों में अध्यापक सेवा
नियमावली के आधार पर शिक्षकों की भर्ती करने की व्यवस्था है।
इसके
तहत बेसिक के सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र अनुपात के आधार पर शिक्षक
रखने की व्यवस्था है। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के
अधिकारियों की मिलीभगत से शिक्षकों की अनियमित तरीके से भर्तियां की जा रही
हैं।
इसकी वजह से शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आए दिन
कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के सहायता
प्राप्त स्कूलों में शिक्षक भर्ती पर रोक है।
फिर भी कुछ जिलों में
चोरी-छिपे बीएसए की मिलीभगत से शिक्षकों की भर्तियां कर ली गई हैं। कुछ
जिलों में तो स्वीकृत पद से अधिक शिक्षकों की भर्तियां की गई हैं। जिला
स्तर पर इसकी जांच भी हो चुकी है।
जैसे जौनपुर एक स्कूल में स्वीकृत
पद से 10 शिक्षक अधिक रख लिए गए हैं तो बलिया के एक स्कूल में स्वीकृत
पांच पद सापेक्ष में दस शिक्षक रखे गए हैं। इसके बाद सरप्लस शिक्षकों का
वेतन रोक दिया गया। इससे शिक्षक संघ आंदोलित हैं।
बीएसए से मांगी विस्तृत जानकारी
बेसिक
शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एक प्रोफार्मा
भेजा है। इसमें पूछा गया है कि उनके यहां कितने एडेड स्कूल हैं।
इनमें
कितने पद शिक्षक और स्टाफ के सृजित हैं और कितनों पर नियुक्तियां की गई
हैं। स्कूल को कब-कब अनुदान पर लिया गया। वर्तमान में अनुदानित स्कूलों की
क्या स्थिति है।
शिक्षकों की भर्ती से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई गई
है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सूचना मिलने के बाद इसकी जांच कराई जाएगी
और सरप्लस मिलने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।