- अवयस्क महिलाओं, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के संबंध में कम से कम 2 साल और अधिकतम 10 साल की सजा होगी। जुर्माने की राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी।
- सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने पर कम से कम 3 साल की सजा और अधिकतम 10 साल तक की सजा होगी। जुर्माना 50 हजार रुपये से कम नहीं होगा। यह एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा जो गैर जमानतीय होगा। ऐसे मामले प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेस्ट के सामने पेश किए जाएंगे।
- अध्यादेश के अनुसार अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के संबंध में ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए वृहद दंड का प्रावधान किया गया है। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में संबंधित सामाजिक संगठनों का पंजीकरण निरस्त करके उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा केवल शादी के लिए अगर धर्म परिवर्तन किया जा रहा है तो ऐसी शादी मान्य नहीं होगी।