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धर्म परिवर्तन कराने वाले को देने होंगे सुबूत, सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 10 साल की सजा व भारी जुर्माना

Sun, 29 Nov 2020 10:00 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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यूपी विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश के कानून बनने के बाद धर्म परिवर्तन कराने वालों को सुबूत देना होगा कि धर्म परिवर्तन किसी प्रलोभन, जोर-जबर्दस्ती, तत्काल प्रभाव, उत्पीड़न और विवाह के लिए नहीं किया गया है, इसके सुबूत धर्म परिवर्तन कराने वाले को देने होंगे।

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धर्म परिवर्तन के इच्छुक होने पर निर्धारित प्रारूप में जिला मजिस्ट्रेस्ट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर 6 माह से तीन साल तक की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।

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सामूहिक धर्म परिवर्तन पर 10 साल की सजा

- अवयस्क महिलाओं, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के संबंध में कम से कम 2 साल और अधिकतम 10 साल की सजा होगी। जुर्माने की राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी।

- सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने पर कम से कम 3 साल की सजा और अधिकतम 10 साल तक की सजा होगी। जुर्माना 50 हजार रुपये से कम नहीं होगा। यह एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा जो गैर जमानतीय होगा। ऐसे मामले प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेस्ट के सामने पेश किए जाएंगे।

- अध्यादेश के अनुसार अवयस्क महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के संबंध में ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए वृहद दंड का प्रावधान किया गया है। सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में संबंधित सामाजिक संगठनों का पंजीकरण निरस्त करके उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा केवल शादी के लिए अगर धर्म परिवर्तन किया जा रहा है तो ऐसी शादी मान्य नहीं होगी।
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