केजीएमयू में अगले महीने से विभिन्न प्रकार के जहर की जांच करने की सुविधा शुरू होने जा रही है। इसके लिए विवि में विशिष्ट लैब तैयार की गई है। इस लैब में सांप के साथ ही अन्य प्रकार के जहर की जांच हो सकेगी। प्रदेश में इस तरह की जांच करने वाला केजीएमयू पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान है। किसी भी व्यक्ति में जहर के प्रकार का पता होने पर उसके इलाज में आसानी होती है।
केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग में इस विशिष्ट लैब तथा इंफॉर्मेशन सेंटर की शुरुआत होने जा रही है। इसके लिए जरूरी उपकरण खरीदे जा चुके हैं। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में कई बार जहरखुरानी या फिर सर्पदंश के मरीज आते हैं। टॉक्सिकोलॉजी लैब न होने की वजह से यह पता लगाना संभव नहीं हो पाता है कि मरीज ने कौन सा जहर खाया है। इस हालत में केवल लक्षण के आधार पर ही मरीज का इलाज किया जाता है। टॉक्सिकोलॉजी लैब होने पर जहर का प्रकार पता करके एंटीडोट देना आसान होगा।
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जहर जांचने की लैब इस समय सिर्फ पुलिस विभाग के पास है, लेकिन इसका उपयोग इलाज के बजाय मृत व्यक्तियों में जहर की जांच के लिए होता है। टॉक्सिकोलॉजी लैब की इंचार्ज डॉ. शिऊली राठौर ने बताया कि शुरुआत में इस लैब में उन जहर की जांच होगी जो कि आमतौर पर देखने को मिलते हैं। इनमें पेस्टीसाइड या फिर किसी दवाई की ओवरडोज की जांच हो सकेगी। अभी इनकी जांच के लिए फीस निर्धारित नहीं है। अन्य संस्थानों की फीस के आधार पर इनका निर्धारण किया जाएगा।
जल्द होगी इंफॉर्मेशन सेंटर की शुरुआत
टॉक्सिकोलॉजी लैब की इंचार्ज डॉ. शिऊली राठौर ने बताया कि लैब स्थापित होने के बाद जल्द ही मरीजों के साथ ही चिकित्सकों की मदद के लिए इंफॉर्मेशन सेंटर शुरू किया जाएगा। इस सेंटर पर फोन सुविधा उपलब्ध होगी। यहां फोन कर लोग बच्चों या बड़ों के कुछ खाने पर इस सेंटर के माध्यम से सलाह ले सकेेंगे। यह सेंटर यह भी बताएगा कि नजदीक के किस अस्पताल पर उसके इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
उपकरण आ चुके हैं
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु का कहना है कि फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग में टॉक्सिकोलॉजी लैब स्थापित होने जा रही है। इसके उपकरण आ चुके हैं। प्रयास है कि अगले महीने तक इसमें जांच शुरू हो जाएगी।