व्याख्यान देते पर्यावरणविद् डॉ. राजेंद्र सिंह।
लखनऊ। हमें पेड़-पौधों व पानी की हर बूंद को सहेजकर रखना होगा। हमारे शास्त्र भी प्रकृति संरक्षण की इसी भावना को प्रोत्साहित करते हैं। प्राचीन ग्रंथ, खास तौर पर अथर्ववेद में भी पृथ्वी के संरक्षण की बात कही गई है। केवल आर्थिक ढांचे के सहारे हम विश्वगुरु बनने का सपना नहीं देख सकते, बल्कि ज्ञान और प्रकृति को साथ लेकर हमें इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
ये बातें जल संरक्षणकर्ता एवं पर्यावरणविद् डॉ. राजेंद्र सिंह ने बुधवार को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में ''जलवायु परिवर्तन'' विषय पर हुए व्याख्यान में कही। उन्होंने कहा कि जिस देश की नदियां सूखने लगती हैं, वहां की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। जल का व्यापार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि नीर, नारी और नदी हमारे लिए नारायण के समान पूजनीय हैं। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, डीएसडब्ल्यू प्रो. नरेंद्र कुमार, प्रो. कमान सिंह, कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद रहे।