यूपी सरकार मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए इवनिंग स्कूल शुरू करने जा रही है। इन स्कूलों में बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाया जाएगा ताकि उनका मन लग सके। इसमें उन बच्चों को पढ़ाया जाएगा जो अभी स्कूल नहीं जाते हैं।
महिला कल्याण विभाग इस योजना का खाका तैयार कर रहा है। इसके तहत सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों के भवनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन स्कूलों का संचालन रानी लक्ष्मी बाई महिला एवं बाल सम्मान कोष के जरिए किया जाएगा।
ये इवनिंग स्कूल ब्रिज कोर्स की तरह काम करेंगे। इसमें कक्षा पांच तक की पढ़ाई कराई जाएगी। इन स्कूलों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के जरिए चलाया जाएगा।
यानी इसमें पढ़ने वाले बच्चों को एनआईओएस की परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद इन बच्चों को शिक्षा विभाग के मुख्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट की लखनऊ से शुरुआत
डेमो पिक
महिला कल्याण विभाग इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत लखनऊ से करने जा रहा है। प्रयोग सफल होने पर दूसरे शहरों में भी ये स्कूल शुरू किए जाएंगे।
फिलहाल विभाग उन स्थानों का चयन कर रहा है जहां ये स्कूल चलाए जा सकते हैं। विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना के संचालन के लिए अच्छे स्वयंसेवी संस्थाओं की तलाश कर रहा है।
बच्चों के लिए खाने-पीने की भी होगी व्यवस्था
इवनिंग स्कूलों में बच्चों के लिए खाने-पीने की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि मलिन बस्तियों के ये बच्चे भोजन के बहाने ही स्कूल आएं।
भोजन पका हुआ दिया जाए या फिर कच्चा, इस पर अभी फाइनल निर्णय नहीं हुआ है। बच्चों को फल वितरित करने की भी योजना बनाई जा रही है।
वालंटियर के जरिए होगी पढ़ाई
इवनिंग स्कूलों में पढ़ाने के लिए समाज के ही इच्छुक लोगों को वालंटियर बनाया जाएगा। ये समाज के पढ़े-लिखे व प्रबुद्ध वर्ग से होंगे। इन्हें इन स्कूलों में एक घंटा बच्चों को निशुल्क पढ़ाना होगा। इसके लिए विभाग पंजीकरण कराएगा। काफी संख्या में वालंटियर पंजीकृत किए जाएंगे, ताकि कुछ लोगों पर ही भार न पड़े।
महिला कल्याण प्रमुख सचिव रेणुका कुमार का कहना है कि स्ट्रीट चिल्ड्रन के लिए इवनिंग स्कूल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लखनऊ में शुरू करने की योजना है। ये स्कूल वालंटियर के जरिए चलाए जाएंगे। इनमें अलग से शिक्षकों को नहीं रखा जाएगा। प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे दूसरे जिलों में भी शुरू किया जाएगा।